24 अक्टूबर 2036 को पटना का पंचांग

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2036, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2036 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (13:50 तक), नक्षत्र मूल (01:51, 25 अक्टू॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 10:08 से 11:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:13
रात 05:53 तक
तिथि
पंचमी, 13:50 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 01:51 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अक्टूबर 2036 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:50 तक
शुक्ल षष्ठी 15:21, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 01:51, 25 अक्टू॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 04:12, 26 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 00:06, 25 अक्टू॰ तक
सुकर्मा 00:24, 26 अक्टू॰ तक
करण
बालव 13:50 तक
कौलव 02:30, 25 अक्टू॰ तक
तैतिल 15:21, 25 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
10:15
चंद्रास्त
21:16
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2093
शक संवत
1958, नल संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
10:08 – 11:33
यमगंड
14:23 – 15:48
गुलिक काल
07:18 – 08:43

24 अक्टूबर 2036 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:52 – 07:18सामान्य
लाभ07:18 – 08:43शुभ
अमृत08:43 – 10:08शुभ
काल10:08 – 11:33टालें
शुभ11:33 – 12:58शुभ
रोग12:58 – 14:23टालें
उद्वेग14:23 – 15:48टालें
चर15:48 – 17:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:13 – 18:48टालें
काल18:48 – 20:23टालें
लाभ20:23 – 21:58शुभ
उद्वेग21:58 – 23:33टालें
शुभ23:33 – 01:08शुभ
अमृत01:08 – 02:43शुभ
चर02:43 – 04:18सामान्य
रोग04:18 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5206:49दिन
बुध06:4907:46दिन
चंद्र07:4608:43दिन
शनि08:4309:39दिन
गुरु09:3910:36दिन
मंगल10:3611:33दिन
सूर्य11:3312:30दिन
शुक्र12:3013:26दिन
बुध13:2614:23दिन
चंद्र14:2315:20दिन
शनि15:2016:17दिन
गुरु16:1717:13दिन
मंगल17:1318:17रात
सूर्य18:1719:20रात
शुक्र19:2020:23रात
बुध20:2321:27रात
चंद्र21:2722:30रात
शनि22:3023:33रात
गुरु23:3300:37रात
मंगल00:3701:40रात
सूर्य01:4002:43रात
शुक्र02:4303:46रात
बुध03:4604:50रात
चंद्र04:5005:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2036शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 नव॰ 2036प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2036कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
7 नव॰ 2036संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 नव॰ 2036कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 नव॰ 2036कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2036प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2036वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2036मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
21 नव॰ 2036विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.3713° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।