31 अक्टूबर 2040 को पटना का पंचांग

बुधवार, 31 अक्टूबर 2040, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 अक्टूबर 2040 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (00:53, 1 नव॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (01:06, 1 नव॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 17:08 पर है। राहुकाल 11:32 से 12:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 17:08
रात 05:57 तक
तिथि
एकादशी, 00:53 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 01:06 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2040 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:53, 1 नव॰ तक
कृष्ण द्वादशी 01:42, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
ब्रह्म 10:56 तक
इंद्र 10:44, 1 नव॰ तक
करण
बव 12:15 तक
बालव 00:53, 1 नव॰ तक
कौलव 13:22, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
17:08
चंद्रोदय
01:35
चंद्रास्त
14:42
दिनमान
11h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2097
शक संवत
1962, रौद्र संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:32 – 12:56
यमगंड
07:21 – 08:44
गुलिक काल
10:08 – 11:32

31 अक्टूबर 2040 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:57 – 07:21शुभ
अमृत07:21 – 08:44शुभ
काल08:44 – 10:08टालें
शुभ10:08 – 11:32शुभ
रोग11:32 – 12:56टालें
उद्वेग12:56 – 14:20टालें
चर14:20 – 15:44सामान्य
लाभ15:44 – 17:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:08 – 18:44टालें
शुभ18:44 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:33सामान्य
रोग23:33 – 01:09टालें
काल01:09 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 04:21शुभ
उद्वेग04:21 – 05:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5706:53दिन
चंद्र06:5307:49दिन
शनि07:4908:44दिन
गुरु08:4409:40दिन
मंगल09:4010:36दिन
सूर्य10:3611:32दिन
शुक्र11:3212:28दिन
बुध12:2813:24दिन
चंद्र13:2414:20दिन
शनि14:2015:16दिन
गुरु15:1616:12दिन
मंगल16:1217:08दिन
सूर्य17:0818:12रात
शुक्र18:1219:16रात
बुध19:1620:20रात
चंद्र20:2021:24रात
शनि21:2422:29रात
गुरु22:2923:33रात
मंगल23:3300:37रात
सूर्य00:3701:41रात
शुक्र01:4102:45रात
बुध02:4503:49रात
चंद्र03:4904:53रात
शनि04:5305:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 अक्टू॰ 2040कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 नव॰ 2040प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 नव॰ 2040कार्तिक अमावस्याअमावस्या
8 नव॰ 2040विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 नव॰ 2040शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2040प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
16 नव॰ 2040वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2040कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
22 नव॰ 2040संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 नव॰ 2040कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4275° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।