27 अक्टूबर 2025 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (08:35 तक), नक्षत्र मूल (15:57 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 07:03 से 08:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 18:37
रात 05:22 तक
तिथि
पंचमी, 08:35 तक
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 15:57 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 08:35 तक
शुक्ल षष्ठी 10:30, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 15:57 तक
पूर्वाषाढ़ा 18:15, 28 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 09:56 तक
सुकर्मा 10:20, 28 अक्टू॰ तक
करण
बालव 08:35 तक
कौलव 21:36 तक
तैतिल 10:30, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
08:54
चंद्रास्त
23:59
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:57 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
07:03 – 08:42
यमगंड
10:21 – 12:00
गुलिक काल
13:39 – 15:19

27 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:23 – 07:03शुभ
काल07:03 – 08:42टालें
शुभ08:42 – 10:21शुभ
रोग10:21 – 12:00टालें
उद्वेग12:00 – 13:39टालें
चर13:39 – 15:19सामान्य
लाभ15:19 – 16:58शुभ
अमृत16:58 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:37 – 19:58सामान्य
रोग19:58 – 21:18टालें
काल21:18 – 22:39टालें
लाभ22:39 – 00:00शुभ
उद्वेग00:00 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:41शुभ
अमृत02:41 – 04:02शुभ
चर04:02 – 05:22सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2306:30दिन
शनि06:3007:36दिन
गुरु07:3608:42दिन
मंगल08:4209:48दिन
सूर्य09:4810:54दिन
शुक्र10:5412:00दिन
बुध12:0013:06दिन
चंद्र13:0614:12दिन
शनि14:1215:19दिन
गुरु15:1916:25दिन
मंगल16:2517:31दिन
सूर्य17:3118:37दिन
शुक्र18:3719:31रात
बुध19:3120:25रात
चंद्र20:2521:18रात
शनि21:1822:12रात
गुरु22:1223:06रात
मंगल23:0600:00रात
सूर्य00:0000:53रात
शुक्र00:5301:47रात
बुध01:4702:41रात
चंद्र02:4103:35रात
शनि03:3504:29रात
गुरु04:2905:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।