27 दिसंबर 2025 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 27 दिसंबर 2025, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (15:40 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:39 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 08:44 से 10:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 19:24
रात 05:11 तक
तिथि
सप्तमी, 15:40 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:39 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 15:40 तक
शुक्ल अष्टमी 14:30, 28 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 11:13, 28 दिस॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 14:51 तक
वरीयान 12:43, 28 दिस॰ तक
करण
वणिज 15:40 तक
विष्टि (भद्रा) 03:09, 28 दिस॰ तक
बव 14:30, 28 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:40 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
11:43
चंद्रास्त
23:54
दिनमान
14h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
08:44 – 10:30
यमगंड
14:04 – 15:51
गुलिक काल
05:10 – 06:57

27 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:10 – 06:57टालें
शुभ06:57 – 08:44शुभ
रोग08:44 – 10:30टालें
उद्वेग10:30 – 12:17टालें
चर12:17 – 14:04सामान्य
लाभ14:04 – 15:51शुभ
अमृत15:51 – 17:37शुभ
काल17:37 – 19:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:24 – 20:37शुभ
उद्वेग20:37 – 21:51टालें
शुभ21:51 – 23:04शुभ
अमृत23:04 – 00:17शुभ
चर00:17 – 01:31सामान्य
रोग01:31 – 02:44टालें
काल02:44 – 03:57टालें
लाभ03:57 – 05:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1006:21दिन
गुरु06:2107:32दिन
मंगल07:3208:44दिन
सूर्य08:4409:55दिन
शुक्र09:5511:06दिन
बुध11:0612:17दिन
चंद्र12:1713:28दिन
शनि13:2814:39दिन
गुरु14:3915:51दिन
मंगल15:5117:02दिन
सूर्य17:0218:13दिन
शुक्र18:1319:24दिन
बुध19:2420:13रात
चंद्र20:1321:02रात
शनि21:0221:51रात
गुरु21:5122:40रात
मंगल22:4023:28रात
सूर्य23:2800:17रात
शुक्र00:1701:06रात
बुध01:0601:55रात
चंद्र01:5502:44रात
शनि02:4403:33रात
गुरु03:3304:22रात
मंगल04:2205:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2201° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।