17 जनवरी 2026 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 17 जनवरी 2026, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 17 जनवरी 2026 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (02:34, 18 जन॰ तक), नक्षत्र मूल (10:42 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 19:25 पर है। राहुकाल 08:56 से 10:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 19:25
रात 05:28 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:34 तक
अमावस्या
नक्षत्र
मूल, 10:42 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 02:34, 18 जन॰ तक
अमावस्या 03:52, 19 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 10:42 तक
पूर्वाषाढ़ा 12:44, 18 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 23:48 तक
हर्षण 23:41, 18 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:46 तक
शकुनि 02:34, 18 जन॰ तक
चतुष्पद 15:16, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
19:25
चंद्रोदय
03:32
चंद्रास्त
18:35
दिनमान
13h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 10:41
यमगंड
14:11 – 15:55
गुलिक काल
05:27 – 07:12

17 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:27 – 07:12टालें
शुभ07:12 – 08:56शुभ
रोग08:56 – 10:41टालें
उद्वेग10:41 – 12:26टालें
चर12:26 – 14:11सामान्य
लाभ14:11 – 15:55शुभ
अमृत15:55 – 17:40शुभ
काल17:40 – 19:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:25 – 20:40शुभ
उद्वेग20:40 – 21:56टालें
शुभ21:56 – 23:11शुभ
अमृत23:11 – 00:26शुभ
चर00:26 – 01:42सामान्य
रोग01:42 – 02:57टालें
काल02:57 – 04:12टालें
लाभ04:12 – 05:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2706:37दिन
गुरु06:3707:46दिन
मंगल07:4608:56दिन
सूर्य08:5610:06दिन
शुक्र10:0611:16दिन
बुध11:1612:26दिन
चंद्र12:2613:36दिन
शनि13:3614:46दिन
गुरु14:4615:55दिन
मंगल15:5517:05दिन
सूर्य17:0518:15दिन
शुक्र18:1519:25दिन
बुध19:2520:15रात
चंद्र20:1521:05रात
शनि21:0521:56रात
गुरु21:5622:46रात
मंगल22:4623:36रात
सूर्य23:3600:26रात
शुक्र00:2601:17रात
बुध01:1702:07रात
चंद्र02:0702:57रात
शनि02:5703:47रात
गुरु03:4704:37रात
मंगल04:3705:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2209° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।