13 जनवरी 2027 को पर्थ का पंचांग

बुधवार, 13 जनवरी 2027, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

बुधवार, 13 जनवरी 2027 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (15:32 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (00:34, 14 जन॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:26 पर है। राहुकाल 12:24 से 14:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:26
रात 05:24 तक
तिथि
पंचमी, 15:32 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 00:34 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जनवरी 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 15:32 तक
शुक्ल षष्ठी 16:29, 14 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 00:34, 14 जन॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 01:49, 15 जन॰ तक
योग
वरीयान 20:24 तक
परिघअशुभ 19:52, 14 जन॰ तक
करण
बालव 15:32 तक
कौलव 04:05, 14 जन॰ तक
तैतिल 16:29, 14 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 18:10 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:26
चंद्रोदय
10:03
चंद्रास्त
22:23
दिनमान
14h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:03 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:24 – 14:10
यमगंड
07:08 – 08:54
गुलिक काल
10:39 – 12:24

13 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:23 – 07:08शुभ
अमृत07:08 – 08:54शुभ
काल08:54 – 10:39टालें
शुभ10:39 – 12:24शुभ
रोग12:24 – 14:10टालें
उद्वेग14:10 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:40सामान्य
लाभ17:40 – 19:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:26 – 20:41टालें
शुभ20:41 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:10शुभ
चर23:10 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:40टालें
काल01:40 – 02:54टालें
लाभ02:54 – 04:09शुभ
उद्वेग04:09 – 05:24टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2306:33दिन
चंद्र06:3307:43दिन
शनि07:4308:54दिन
गुरु08:5410:04दिन
मंगल10:0411:14दिन
सूर्य11:1412:24दिन
शुक्र12:2413:35दिन
बुध13:3514:45दिन
चंद्र14:4515:55दिन
शनि15:5517:05दिन
गुरु17:0518:16दिन
मंगल18:1619:26दिन
सूर्य19:2620:16रात
शुक्र20:1621:05रात
बुध21:0521:55रात
चंद्र21:5522:45रात
शनि22:4523:35रात
गुरु23:3500:25रात
मंगल00:2501:15रात
सूर्य01:1502:04रात
शुक्र02:0402:54रात
बुध02:5403:44रात
चंद्र03:4404:34रात
शनि04:3405:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
26 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2347° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।