24 जनवरी 2028 को पर्थ का पंचांग

सोमवार, 24 जनवरी 2028, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

सोमवार, 24 जनवरी 2028 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (18:39 तक), नक्षत्र मूल (13:58 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 07:17 से 09:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 19:23
रात 05:34 तक
तिथि
त्रयोदशी, 18:39 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 13:58 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 18:39 तक
कृष्ण चतुर्दशी 20:47, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:58 तक
पूर्वाषाढ़ा 16:29, 25 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 14:52 तक
हर्षण 15:20, 25 जन॰ तक
करण
गर 05:43 तक
वणिज 18:39 तक
विष्टि (भद्रा) 07:40, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
03:04
चंद्रास्त
17:53
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
07:17 – 09:00
यमगंड
10:44 – 12:28
गुलिक काल
14:11 – 15:55

24 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:33 – 07:17शुभ
काल07:17 – 09:00टालें
शुभ09:00 – 10:44शुभ
रोग10:44 – 12:28टालें
उद्वेग12:28 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:55सामान्य
लाभ15:55 – 17:39शुभ
अमृत17:39 – 19:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:23 – 20:39सामान्य
रोग20:39 – 21:55टालें
काल21:55 – 23:12टालें
लाभ23:12 – 00:28शुभ
उद्वेग00:28 – 01:45टालें
शुभ01:45 – 03:01शुभ
अमृत03:01 – 04:17शुभ
चर04:17 – 05:34सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3306:42दिन
शनि06:4207:51दिन
गुरु07:5109:00दिन
मंगल09:0010:09दिन
सूर्य10:0911:19दिन
शुक्र11:1912:28दिन
बुध12:2813:37दिन
चंद्र13:3714:46दिन
शनि14:4615:55दिन
गुरु15:5517:04दिन
मंगल17:0418:13दिन
सूर्य18:1319:23दिन
शुक्र19:2320:14रात
बुध20:1421:04रात
चंद्र21:0421:55रात
शनि21:5522:46रात
गुरु22:4623:37रात
मंगल23:3700:28रात
सूर्य00:2801:19रात
शुक्र01:1902:10रात
बुध02:1003:01रात
चंद्र03:0103:52रात
शनि03:5204:43रात
गुरु04:4305:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
31 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2491° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।