22 सितंबर 2029 को पर्थ का पंचांग

शनिवार, 22 सितंबर 2029, पर्थ, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Perth में है।

शनिवार, 22 सितंबर 2029 को पर्थ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (00:29, 23 सित॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (19:51 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:12 पर है। राहुकाल 09:07 से 10:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:12
रात 06:04 तक
तिथि
पूर्णिमा, 00:29 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 19:51 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 00:29, 23 सित॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 02:29, 24 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 22:21, 23 सित॰ तक
योग
गंडअशुभ 04:07, 23 सित॰ तक
वृद्धि 04:42, 24 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:36 तक
बव 00:29, 23 सित॰ तक
बालव 13:27, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 13:16 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:12
चंद्रोदय
17:58
चंद्रास्त
05:26
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
09:07 – 10:38
यमगंड
13:40 – 15:11
गुलिक काल
06:06 – 07:37

22 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:06 – 07:37टालें
शुभ07:37 – 09:07शुभ
रोग09:07 – 10:38टालें
उद्वेग10:38 – 12:09टालें
चर12:09 – 13:40सामान्य
लाभ13:40 – 15:11शुभ
अमृत15:11 – 16:41शुभ
काल16:41 – 18:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:12 – 19:41शुभ
उद्वेग19:41 – 21:10टालें
शुभ21:10 – 22:39शुभ
अमृत22:39 – 00:08शुभ
चर00:08 – 01:37सामान्य
रोग01:37 – 03:06टालें
काल03:06 – 04:35टालें
लाभ04:35 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0607:06दिन
गुरु07:0608:07दिन
मंगल08:0709:07दिन
सूर्य09:0710:08दिन
शुक्र10:0811:08दिन
बुध11:0812:09दिन
चंद्र12:0913:10दिन
शनि13:1014:10दिन
गुरु14:1015:11दिन
मंगल15:1116:11दिन
सूर्य16:1117:12दिन
शुक्र17:1218:12दिन
बुध18:1219:12रात
चंद्र19:1220:11रात
शनि20:1121:10रात
गुरु21:1022:10रात
मंगल22:1023:09रात
सूर्य23:0900:08रात
शुक्र00:0801:08रात
बुध01:0802:07रात
चंद्र02:0703:06रात
शनि03:0604:06रात
गुरु04:0605:05रात
मंगल05:0506:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
27 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पर्थ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2723° (लाहिड़ी)। समय पर्थ (Australia/Perth) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।