28 फ़रवरी 2025 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (03:16, 1 मार्च तक), नक्षत्र शतभिषा (13:40 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:54 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 11:18 से 12:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:54 – 18:40
रात 06:53 तक
तिथि
प्रतिपदा, 03:16 तक
द्वितीया
नक्षत्र
शतभिषा, 13:40 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 03:16, 1 मार्च तक
शुक्ल द्वितीया 00:09, 2 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:40 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:22, 1 मार्च तक
योग
सिद्ध 20:07 तक
साध्य 16:24, 1 मार्च तक
करण
किंस्तुघ्न 16:47 तक
बव 03:16, 1 मार्च तक
बालव 13:43, 1 मार्च तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:58, 1 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:54
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
07:04
चंद्रास्त
19:07
दिनमान
11h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
11:18 – 12:47
यमगंड
15:43 – 17:11
गुलिक काल
08:22 – 09:50

28 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:54 – 08:22सामान्य
लाभ08:22 – 09:50शुभ
अमृत09:50 – 11:18शुभ
काल11:18 – 12:47टालें
शुभ12:47 – 14:15शुभ
रोग14:15 – 15:43टालें
उद्वेग15:43 – 17:11टालें
चर17:11 – 18:40सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:40 – 20:11टालें
काल20:11 – 21:43टालें
लाभ21:43 – 23:15शुभ
उद्वेग23:15 – 00:46टालें
शुभ00:46 – 02:18शुभ
अमृत02:18 – 03:50शुभ
चर03:50 – 05:21सामान्य
रोग05:21 – 06:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5407:53दिन
बुध07:5308:51दिन
चंद्र08:5109:50दिन
शनि09:5010:49दिन
गुरु10:4911:48दिन
मंगल11:4812:47दिन
सूर्य12:4713:45दिन
शुक्र13:4514:44दिन
बुध14:4415:43दिन
चंद्र15:4316:42दिन
शनि16:4217:41दिन
गुरु17:4118:40दिन
मंगल18:4019:41रात
सूर्य19:4120:42रात
शुक्र20:4221:43रात
बुध21:4322:44रात
चंद्र22:4423:45रात
शनि23:4500:46रात
गुरु00:4601:47रात
मंगल01:4702:49रात
सूर्य02:4903:50रात
शुक्र03:5004:51रात
बुध04:5105:52रात
चंद्र05:5206:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2085° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।