25 जून 2025 को पुणे का पंचांग

बुधवार, 25 जून 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 जून 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:01 तक), नक्षत्र मृगशिरा (10:40 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 12:37 से 14:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 19:14
रात 06:00 तक
तिथि
अमावस्या, 16:01 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मृगशिरा, 10:40 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जून 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 16:01 तक
शुक्ल प्रतिपदा 13:25, 26 जून तक
नक्षत्र
आर्द्रा 08:46, 26 जून तक
योग
गंडअशुभ 06:00 तक
वृद्धि 02:39, 26 जून तक
ध्रुव 23:40, 26 जून तक
करण
नाग 16:01 तक
किंस्तुघ्न 02:40, 26 जून तक
बव 13:25, 26 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
05:29
चंद्रास्त
19:27
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 13:03 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:37 – 14:16
यमगंड
07:39 – 09:18
गुलिक काल
10:57 – 12:37

25 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:00 – 07:39शुभ
अमृत07:39 – 09:18शुभ
काल09:18 – 10:57टालें
शुभ10:57 – 12:37शुभ
रोग12:37 – 14:16टालें
उद्वेग14:16 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:35सामान्य
लाभ17:35 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:14 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:16शुभ
चर23:16 – 00:37सामान्य
रोग00:37 – 01:58टालें
काल01:58 – 03:18टालें
लाभ03:18 – 04:39शुभ
उद्वेग04:39 – 06:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0007:06दिन
चंद्र07:0608:12दिन
शनि08:1209:18दिन
गुरु09:1810:24दिन
मंगल10:2411:31दिन
सूर्य11:3112:37दिन
शुक्र12:3713:43दिन
बुध13:4314:49दिन
चंद्र14:4915:55दिन
शनि15:5517:02दिन
गुरु17:0218:08दिन
मंगल18:0819:14दिन
सूर्य19:1420:08रात
शुक्र20:0821:02रात
बुध21:0221:55रात
चंद्र21:5522:49रात
शनि22:4923:43रात
गुरु23:4300:37रात
मंगल00:3701:31रात
सूर्य01:3102:25रात
शुक्र02:2503:18रात
बुध03:1804:12रात
चंद्र04:1205:06रात
शनि05:0606:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2130° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।