2 जुलाई 2025 को पुणे का पंचांग

बुधवार, 2 जुलाई 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 जुलाई 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (11:59 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (11:07 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 12:38 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 19:15
रात 06:02 तक
तिथि
सप्तमी, 11:59 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 11:07 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जुलाई 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 11:59 तक
शुक्ल अष्टमी 14:07, 3 जुल॰ तक
नक्षत्र
हस्त 13:50, 3 जुल॰ तक
योग
वरीयान 17:46 तक
परिघअशुभ 18:35, 3 जुल॰ तक
करण
वणिज 11:59 तक
विष्टि (भद्रा) 01:00, 3 जुल॰ तक
बव 14:07, 3 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
12:12
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 13:05 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:38 – 14:17
यमगंड
07:41 – 09:20
गुलिक काल
10:59 – 12:38

2 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:02 – 07:41शुभ
अमृत07:41 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:59टालें
शुभ10:59 – 12:38शुभ
रोग12:38 – 14:17टालें
उद्वेग14:17 – 15:56टालें
चर15:56 – 17:36सामान्य
लाभ17:36 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:15 – 20:36टालें
शुभ20:36 – 21:57शुभ
अमृत21:57 – 23:17शुभ
चर23:17 – 00:38सामान्य
रोग00:38 – 01:59टालें
काल01:59 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:41शुभ
उद्वेग04:41 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0207:08दिन
चंद्र07:0808:14दिन
शनि08:1409:20दिन
गुरु09:2010:26दिन
मंगल10:2611:32दिन
सूर्य11:3212:38दिन
शुक्र12:3813:44दिन
बुध13:4414:50दिन
चंद्र14:5015:56दिन
शनि15:5617:03दिन
गुरु17:0318:09दिन
मंगल18:0919:15दिन
सूर्य19:1520:09रात
शुक्र20:0921:03रात
बुध21:0321:57रात
चंद्र21:5722:50रात
शनि22:5023:44रात
गुरु23:4400:38रात
मंगल00:3801:32रात
सूर्य01:3202:26रात
शुक्र02:2603:20रात
बुध03:2004:14रात
चंद्र04:1405:08रात
शनि05:0806:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2133° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।