11 जुलाई 2025 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (02:09, 12 जुल॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (06:36, 12 जुल॰ तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 11:01 से 12:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 19:15
रात 06:05 तक
तिथि
प्रतिपदा, 02:09 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जुलाई 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 02:09, 12 जुल॰ तक
कृष्ण द्वितीया 01:46, 13 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 06:36, 12 जुल॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 20:44 तक
विष्कंभअशुभ 19:31, 12 जुल॰ तक
करण
बालव 14:11 तक
कौलव 02:09, 12 जुल॰ तक
तैतिल 14:00, 12 जुल॰ तक
चंद्र राशि
धनु 12:08 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
19:56
चंद्रास्त
06:13
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
11:01 – 12:40
यमगंड
15:57 – 17:36
गुलिक काल
07:43 – 09:22

11 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:05 – 07:43सामान्य
लाभ07:43 – 09:22शुभ
अमृत09:22 – 11:01शुभ
काल11:01 – 12:40टालें
शुभ12:40 – 14:18शुभ
रोग14:18 – 15:57टालें
उद्वेग15:57 – 17:36टालें
चर17:36 – 19:15सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:15 – 20:36टालें
काल20:36 – 21:57टालें
लाभ21:57 – 23:18शुभ
उद्वेग23:18 – 00:40टालें
शुभ00:40 – 02:01शुभ
अमृत02:01 – 03:22शुभ
चर03:22 – 04:44सामान्य
रोग04:44 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0507:10दिन
बुध07:1008:16दिन
चंद्र08:1609:22दिन
शनि09:2210:28दिन
गुरु10:2811:34दिन
मंगल11:3412:40दिन
सूर्य12:4013:45दिन
शुक्र13:4514:51दिन
बुध14:5115:57दिन
चंद्र15:5717:03दिन
शनि17:0318:09दिन
गुरु18:0919:15दिन
मंगल19:1520:09रात
सूर्य20:0921:03रात
शुक्र21:0321:57रात
बुध21:5722:51रात
चंद्र22:5123:46रात
शनि23:4600:40रात
गुरु00:4001:34रात
मंगल01:3402:28रात
सूर्य02:2803:22रात
शुक्र03:2204:16रात
बुध04:1605:11रात
चंद्र05:1106:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2136° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।