13 जुलाई 2025 को पुणे का पंचांग

रविवार, 13 जुलाई 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 13 जुलाई 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:03, 14 जुल॰ तक), नक्षत्र श्रवण (06:53 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 17:36 से 19:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 19:14
रात 06:06 तक
तिथि
तृतीया, 01:03 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 जुलाई 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:03, 14 जुल॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 00:00, 15 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 06:53 तक
धनिष्ठा 06:49, 14 जुल॰ तक
योग
प्रीति 18:00 तक
आयुष्मान 16:13, 14 जुल॰ तक
करण
वणिज 13:27 तक
विष्टि (भद्रा) 01:03, 14 जुल॰ तक
बव 12:33, 14 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 18:53 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
21:22
चंद्रास्त
08:10
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
17:36 – 19:14
यमगंड
12:40 – 14:18
गुलिक काल
15:57 – 17:36

13 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:05 – 07:44टालें
चर07:44 – 09:23सामान्य
लाभ09:23 – 11:01शुभ
अमृत11:01 – 12:40शुभ
काल12:40 – 14:18टालें
शुभ14:18 – 15:57शुभ
रोग15:57 – 17:36टालें
उद्वेग17:36 – 19:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:14 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:19सामान्य
रोग23:19 – 00:40टालें
काल00:40 – 02:01टालें
लाभ02:01 – 03:23शुभ
उद्वेग03:23 – 04:44टालें
शुभ04:44 – 06:06शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0507:11दिन
शुक्र07:1108:17दिन
बुध08:1709:23दिन
चंद्र09:2310:28दिन
शनि10:2811:34दिन
गुरु11:3412:40दिन
मंगल12:4013:46दिन
सूर्य13:4614:51दिन
शुक्र14:5115:57दिन
बुध15:5717:03दिन
चंद्र17:0318:09दिन
शनि18:0919:14दिन
गुरु19:1420:09रात
मंगल20:0921:03रात
सूर्य21:0321:57रात
शुक्र21:5722:51रात
बुध22:5123:46रात
चंद्र23:4600:40रात
शनि00:4001:34रात
गुरु01:3402:29रात
मंगल02:2903:23रात
सूर्य03:2304:17रात
शुक्र04:1705:11रात
बुध05:1106:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2137° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।