14 अगस्त 2025 को पुणे का पंचांग

गुरुवार, 14 अगस्त 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 14 अगस्त 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (02:07, 15 अग॰ तक), नक्षत्र रेवती (09:06 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 14:14 से 15:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 19:02
रात 06:16 तक
तिथि
षष्ठी, 02:07 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रेवती, 09:06 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अगस्त 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 02:07, 15 अग॰ तक
कृष्ण सप्तमी 23:50, 15 अग॰ तक
नक्षत्र
रेवती 09:06 तक
अश्विनी 07:36, 15 अग॰ तक
योग
शूलअशुभ 13:12 तक
गंडअशुभ 10:16, 15 अग॰ तक
करण
गर 15:16 तक
वणिज 02:07, 15 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:58, 15 अग॰ तक
चंद्र राशि
मीन 09:06 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
22:35
चंद्रास्त
10:48
दिनमान
12h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:04

अशुभ समय

राहुकाल
14:14 – 15:50
यमगंड
06:16 – 07:51
गुलिक काल
09:27 – 11:03

14 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:16 – 07:51शुभ
रोग07:51 – 09:27टालें
उद्वेग09:27 – 11:03टालें
चर11:03 – 12:39सामान्य
लाभ12:39 – 14:14शुभ
अमृत14:14 – 15:50शुभ
काल15:50 – 17:26टालें
शुभ17:26 – 19:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:02 – 20:26शुभ
चर20:26 – 21:50सामान्य
रोग21:50 – 23:15टालें
काल23:15 – 00:39टालें
लाभ00:39 – 02:03शुभ
उद्वेग02:03 – 03:27टालें
शुभ03:27 – 04:52शुभ
अमृत04:52 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1607:19दिन
मंगल07:1908:23दिन
सूर्य08:2309:27दिन
शुक्र09:2710:31दिन
बुध10:3111:35दिन
चंद्र11:3512:39दिन
शनि12:3913:42दिन
गुरु13:4214:46दिन
मंगल14:4615:50दिन
सूर्य15:5016:54दिन
शुक्र16:5417:58दिन
बुध17:5819:02दिन
चंद्र19:0219:58रात
शनि19:5820:54रात
गुरु20:5421:50रात
मंगल21:5022:46रात
सूर्य22:4623:43रात
शुक्र23:4300:39रात
बुध00:3901:35रात
चंद्र01:3502:31रात
शनि02:3103:27रात
गुरु03:2704:23रात
मंगल04:2305:20रात
सूर्य05:2006:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2149° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।