10 अक्टूबर 2025 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (19:38 तक), नक्षत्र कृत्तिका (17:31 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 10:52 से 12:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 18:15
रात 06:27 तक
तिथि
चतुर्थी, 19:38 तक
पंचमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 17:31 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 19:38 तक
कृष्ण पंचमी 16:43, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:20, 11 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 17:41 तक
व्यतीपातअशुभ 14:07, 11 अक्टू॰ तक
करण
बव 09:14 तक
बालव 19:38 तक
कौलव 06:08, 11 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:43, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
20:52
चंद्रास्त
09:37
दिनमान
11h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
10:52 – 12:21
यमगंड
15:18 – 16:47
गुलिक काल
07:55 – 09:24

10 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:27 – 07:55सामान्य
लाभ07:55 – 09:24शुभ
अमृत09:24 – 10:52शुभ
काल10:52 – 12:21टालें
शुभ12:21 – 13:50शुभ
रोग13:50 – 15:18टालें
उद्वेग15:18 – 16:47टालें
चर16:47 – 18:15सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:15 – 19:47टालें
काल19:47 – 21:18टालें
लाभ21:18 – 22:50शुभ
उद्वेग22:50 – 00:21टालें
शुभ00:21 – 01:53शुभ
अमृत01:53 – 03:24शुभ
चर03:24 – 04:55सामान्य
रोग04:55 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2707:26दिन
बुध07:2608:25दिन
चंद्र08:2509:24दिन
शनि09:2410:23दिन
गुरु10:2311:22दिन
मंगल11:2212:21दिन
सूर्य12:2113:20दिन
शुक्र13:2014:19दिन
बुध14:1915:18दिन
चंद्र15:1816:17दिन
शनि16:1717:16दिन
गुरु17:1618:15दिन
मंगल18:1519:16रात
सूर्य19:1620:17रात
शुक्र20:1721:18रात
बुध21:1822:19रात
चंद्र22:1923:20रात
शनि23:2000:21रात
गुरु00:2101:22रात
मंगल01:2202:23रात
सूर्य02:2303:24रात
शुक्र03:2404:25रात
बुध04:2505:26रात
चंद्र05:2606:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2171° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।