30 नवंबर 2025 को पुणे का पंचांग

रविवार, 30 नवंबर 2025, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 30 नवंबर 2025 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (21:29 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (01:11, 1 दिस॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 16:33 से 17:56 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 17:56
रात 06:50 तक
तिथि
दशमी, 21:29 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 01:11 तक
रेवती
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 नवंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 21:29 तक
शुक्ल एकादशी 19:01, 1 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 01:11, 1 दिस॰ तक
रेवती 23:18, 1 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 07:12 तक
सिद्धि 04:22, 1 दिस॰ तक
व्यतीपातअशुभ 00:59, 2 दिस॰ तक
करण
तैतिल 10:28 तक
गर 21:29 तक
वणिज 08:20, 1 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
14:06
चंद्रास्त
01:45
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
16:33 – 17:56
यमगंड
12:23 – 13:46
गुलिक काल
15:09 – 16:33

30 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:49 – 08:13टालें
चर08:13 – 09:36सामान्य
लाभ09:36 – 10:59शुभ
अमृत10:59 – 12:23शुभ
काल12:23 – 13:46टालें
शुभ13:46 – 15:09शुभ
रोग15:09 – 16:33टालें
उद्वेग16:33 – 17:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:56 – 19:33शुभ
अमृत19:33 – 21:09शुभ
चर21:09 – 22:46सामान्य
रोग22:46 – 00:23टालें
काल00:23 – 02:00टालें
लाभ02:00 – 03:37शुभ
उद्वेग03:37 – 05:13टालें
शुभ05:13 – 06:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4907:45दिन
शुक्र07:4508:41दिन
बुध08:4109:36दिन
चंद्र09:3610:32दिन
शनि10:3211:27दिन
गुरु11:2712:23दिन
मंगल12:2313:18दिन
सूर्य13:1814:14दिन
शुक्र14:1415:09दिन
बुध15:0916:05दिन
चंद्र16:0517:00दिन
शनि17:0017:56दिन
गुरु17:5619:00रात
मंगल19:0020:05रात
सूर्य20:0521:09रात
शुक्र21:0922:14रात
बुध22:1423:18रात
चंद्र23:1800:23रात
शनि00:2301:27रात
गुरु01:2702:32रात
मंगल02:3203:37रात
सूर्य03:3704:41रात
शुक्र04:4105:46रात
बुध05:4606:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2190° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।