2 जुलाई 2026 को पुणे का पंचांग

गुरुवार, 2 जुलाई 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (09:38 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (09:27 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 14:17 से 15:56 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 19:15
रात 06:02 तक
तिथि
द्वितीया, 09:38 तक
तृतीया
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जुलाई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 09:38 तक
कृष्ण तृतीया 11:20, 3 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:46, 3 जुल॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 16:39 तक
विष्कंभअशुभ 17:00, 3 जुल॰ तक
करण
गर 09:38 तक
वणिज 22:32 तक
विष्टि (भद्रा) 11:20, 3 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
21:11
चंद्रास्त
07:48
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
14:17 – 15:56
यमगंड
06:01 – 07:41
गुलिक काल
09:20 – 10:59

2 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:01 – 07:41शुभ
रोग07:41 – 09:20टालें
उद्वेग09:20 – 10:59टालें
चर10:59 – 12:38सामान्य
लाभ12:38 – 14:17शुभ
अमृत14:17 – 15:56शुभ
काल15:56 – 17:36टालें
शुभ17:36 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:15 – 20:36शुभ
चर20:36 – 21:56सामान्य
रोग21:56 – 23:17टालें
काल23:17 – 00:38टालें
लाभ00:38 – 01:59शुभ
उद्वेग01:59 – 03:20टालें
शुभ03:20 – 04:41शुभ
अमृत04:41 – 06:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0107:08दिन
मंगल07:0808:14दिन
सूर्य08:1409:20दिन
शुक्र09:2010:26दिन
बुध10:2611:32दिन
चंद्र11:3212:38दिन
शनि12:3813:44दिन
गुरु13:4414:50दिन
मंगल14:5015:56दिन
सूर्य15:5617:02दिन
शुक्र17:0218:09दिन
बुध18:0919:15दिन
चंद्र19:1520:09रात
शनि20:0921:03रात
गुरु21:0321:56रात
मंगल21:5622:50रात
सूर्य22:5023:44रात
शुक्र23:4400:38रात
बुध00:3801:32रात
चंद्र01:3202:26रात
शनि02:2603:20रात
गुरु03:2004:14रात
मंगल04:1405:08रात
सूर्य05:0806:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2272° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।