11 जुलाई 2026 को पुणे का पंचांग

शनिवार, 11 जुलाई 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 जुलाई 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (02:04, 12 जुल॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (11:03 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 09:22 से 11:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 19:15
रात 06:05 तक
तिथि
द्वादशी, 02:04 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 11:03 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जुलाई 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:04, 12 जुल॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 22:30, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:29, 12 जुल॰ तक
योग
गंडअशुभ 00:05, 12 जुल॰ तक
वृद्धि 20:06, 12 जुल॰ तक
करण
कौलव 15:46 तक
तैतिल 02:04, 12 जुल॰ तक
गर 12:18, 12 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
02:26
चंद्रास्त
16:13
दिनमान
13h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
09:22 – 11:01
यमगंड
14:18 – 15:57
गुलिक काल
06:04 – 07:43

11 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:04 – 07:43टालें
शुभ07:43 – 09:22शुभ
रोग09:22 – 11:01टालें
उद्वेग11:01 – 12:40टालें
चर12:40 – 14:18सामान्य
लाभ14:18 – 15:57शुभ
अमृत15:57 – 17:36शुभ
काल17:36 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:15 – 20:36शुभ
उद्वेग20:36 – 21:57टालें
शुभ21:57 – 23:18शुभ
अमृत23:18 – 00:40शुभ
चर00:40 – 02:01सामान्य
रोग02:01 – 03:22टालें
काल03:22 – 04:44टालें
लाभ04:44 – 06:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0407:10दिन
गुरु07:1008:16दिन
मंगल08:1609:22दिन
सूर्य09:2210:28दिन
शुक्र10:2811:34दिन
बुध11:3412:40दिन
चंद्र12:4013:45दिन
शनि13:4514:51दिन
गुरु14:5115:57दिन
मंगल15:5717:03दिन
सूर्य17:0318:09दिन
शुक्र18:0919:15दिन
बुध19:1520:09रात
चंद्र20:0921:03रात
शनि21:0321:57रात
गुरु21:5722:51रात
मंगल22:5123:46रात
सूर्य23:4600:40रात
शुक्र00:4001:34रात
बुध01:3402:28रात
चंद्र02:2803:22रात
शनि03:2204:16रात
गुरु04:1605:11रात
मंगल05:1106:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2276° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।