1 अगस्त 2026 को पुणे का पंचांग

शनिवार, 1 अगस्त 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 1 अगस्त 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (23:07 तक), नक्षत्र शतभिषा (20:45 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 09:26 से 11:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 19:09
रात 06:12 तक
तिथि
तृतीया, 23:07 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
शतभिषा, 20:45 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अगस्त 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 23:07 तक
कृष्ण चतुर्थी 23:15, 2 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 20:45 तक
योग
शोभन 23:23 तक
अतिगंडअशुभ 22:29, 2 अग॰ तक
करण
वणिज 10:53 तक
विष्टि (भद्रा) 23:07 तक
बव 11:15, 2 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
21:01
चंद्रास्त
08:20
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
09:26 – 11:03
यमगंड
14:18 – 15:55
गुलिक काल
06:12 – 07:49

1 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:12 – 07:49टालें
शुभ07:49 – 09:26शुभ
रोग09:26 – 11:03टालें
उद्वेग11:03 – 12:40टालें
चर12:40 – 14:18सामान्य
लाभ14:18 – 15:55शुभ
अमृत15:55 – 17:32शुभ
काल17:32 – 19:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:09 – 20:32शुभ
उद्वेग20:32 – 21:55टालें
शुभ21:55 – 23:18शुभ
अमृत23:18 – 00:40शुभ
चर00:40 – 02:03सामान्य
रोग02:03 – 03:26टालें
काल03:26 – 04:49टालें
लाभ04:49 – 06:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:1207:16दिन
गुरु07:1608:21दिन
मंगल08:2109:26दिन
सूर्य09:2610:31दिन
शुक्र10:3111:36दिन
बुध11:3612:40दिन
चंद्र12:4013:45दिन
शनि13:4514:50दिन
गुरु14:5015:55दिन
मंगल15:5516:59दिन
सूर्य16:5918:04दिन
शुक्र18:0419:09दिन
बुध19:0920:04रात
चंद्र20:0420:59रात
शनि20:5921:55रात
गुरु21:5522:50रात
मंगल22:5023:45रात
सूर्य23:4500:40रात
शुक्र00:4001:36रात
बुध01:3602:31रात
चंद्र02:3103:26रात
शनि03:2604:22रात
गुरु04:2205:17रात
मंगल05:1706:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2284° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।