20 दिसंबर 2026 को पुणे का पंचांग

रविवार, 20 दिसंबर 2026, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 दिसंबर 2026 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (20:15 तक), नक्षत्र अश्विनी (14:55 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 16:39 से 18:02 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 18:02
रात 07:01 तक
तिथि
एकादशी, 20:15 तक
द्वादशी
नक्षत्र
अश्विनी, 14:55 तक
भरणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 दिसंबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:15 तक
शुक्ल द्वादशी 17:36, 21 दिस॰ तक
नक्षत्र
भरणी 13:09, 21 दिस॰ तक
योग
परिघअशुभ 08:10 तक
शिव 05:07, 21 दिस॰ तक
सिद्ध 01:32, 22 दिस॰ तक
करण
वणिज 09:18 तक
विष्टि (भद्रा) 20:15 तक
बव 07:00, 21 दिस॰ तक
बालव 17:36, 21 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
14:26
चंद्रास्त
02:48
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
16:39 – 18:02
यमगंड
12:32 – 13:54
गुलिक काल
15:17 – 16:39

20 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:01 – 08:24टालें
चर08:24 – 09:46सामान्य
लाभ09:46 – 11:09शुभ
अमृत11:09 – 12:32शुभ
काल12:32 – 13:54टालें
शुभ13:54 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:39टालें
उद्वेग16:39 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:02 – 19:40शुभ
अमृत19:40 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:54सामान्य
रोग22:54 – 00:32टालें
काल00:32 – 02:09टालें
लाभ02:09 – 03:47शुभ
उद्वेग03:47 – 05:24टालें
शुभ05:24 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0107:56दिन
शुक्र07:5608:51दिन
बुध08:5109:46दिन
चंद्र09:4610:41दिन
शनि10:4111:36दिन
गुरु11:3612:32दिन
मंगल12:3213:27दिन
सूर्य13:2714:22दिन
शुक्र14:2215:17दिन
बुध15:1716:12दिन
चंद्र16:1217:07दिन
शनि17:0718:02दिन
गुरु18:0219:07रात
मंगल19:0720:12रात
सूर्य20:1221:17रात
शुक्र21:1722:22रात
बुध22:2223:27रात
चंद्र23:2700:32रात
शनि00:3201:37रात
गुरु01:3702:42रात
मंगल02:4203:47रात
सूर्य03:4704:52रात
शुक्र04:5205:57रात
बुध05:5707:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2338° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।