19 जुलाई 2027 को पुणे का पंचांग

सोमवार, 19 जुलाई 2027, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 19 जुलाई 2027 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:48 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (14:23 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 07:45 से 09:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 19:13
रात 06:08 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:48 तक
द्वितीया
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 14:23 तक
श्रवण
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 जुलाई 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:48 तक
कृष्ण द्वितीया 02:21, 21 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:31, 20 जुल॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 16:26 तक
प्रीति 17:32, 20 जुल॰ तक
करण
बालव 10:31 तक
कौलव 23:48 तक
तैतिल 13:05, 20 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
19:50
चंद्रास्त
06:29
दिनमान
13h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
07:45 – 09:24
यमगंड
11:02 – 12:40
गुलिक काल
14:19 – 15:57

19 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:07 – 07:45शुभ
काल07:45 – 09:24टालें
शुभ09:24 – 11:02शुभ
रोग11:02 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:19टालें
चर14:19 – 15:57सामान्य
लाभ15:57 – 17:35शुभ
अमृत17:35 – 19:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:13 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:19टालें
लाभ23:19 – 00:40शुभ
उद्वेग00:40 – 02:02टालें
शुभ02:02 – 03:24शुभ
अमृत03:24 – 04:46शुभ
चर04:46 – 06:08सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0707:13दिन
शनि07:1308:18दिन
गुरु08:1809:24दिन
मंगल09:2410:29दिन
सूर्य10:2911:35दिन
शुक्र11:3512:40दिन
बुध12:4013:46दिन
चंद्र13:4614:51दिन
शनि14:5115:57दिन
गुरु15:5717:02दिन
मंगल17:0218:08दिन
सूर्य18:0819:13दिन
शुक्र19:1320:08रात
बुध20:0821:02रात
चंद्र21:0221:57रात
शनि21:5722:51रात
गुरु22:5123:46रात
मंगल23:4600:40रात
सूर्य00:4001:35रात
शुक्र01:3502:29रात
बुध02:2903:24रात
चंद्र03:2404:19रात
शनि04:1905:13रात
गुरु05:1306:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2418° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।