20 जुलाई 2028 को पुणे का पंचांग

गुरुवार, 20 जुलाई 2028, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 20 जुलाई 2028 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:37 तक), नक्षत्र मृगशिरा (08:08 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 14:19 से 15:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 19:13
रात 06:08 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:37 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
आर्द्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जुलाई 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:37 तक
कृष्ण चतुर्दशी 11:18, 21 जुल॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 06:43, 21 जुल॰ तक
योग
ध्रुव 07:36 तक
व्याघातअशुभ 04:48, 21 जुल॰ तक
हर्षण 01:35, 22 जुल॰ तक
करण
वणिज 13:37 तक
विष्टि (भद्रा) 00:31, 21 जुल॰ तक
शकुनि 11:18, 21 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
03:58
चंद्रास्त
17:43
दिनमान
13h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
12:14 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
14:19 – 15:57
यमगंड
06:08 – 07:46
गुलिक काल
09:24 – 11:02

20 जुलाई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:46शुभ
रोग07:46 – 09:24टालें
उद्वेग09:24 – 11:02टालें
चर11:02 – 12:40सामान्य
लाभ12:40 – 14:19शुभ
अमृत14:19 – 15:57शुभ
काल15:57 – 17:35टालें
शुभ17:35 – 19:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:13 – 20:35शुभ
चर20:35 – 21:57सामान्य
रोग21:57 – 23:19टालें
काल23:19 – 00:41टालें
लाभ00:41 – 02:02शुभ
उद्वेग02:02 – 03:24टालें
शुभ03:24 – 04:46शुभ
अमृत04:46 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:13दिन
मंगल07:1308:19दिन
सूर्य08:1909:24दिन
शुक्र09:2410:30दिन
बुध10:3011:35दिन
चंद्र11:3512:40दिन
शनि12:4013:46दिन
गुरु13:4614:51दिन
मंगल14:5115:57दिन
सूर्य15:5717:02दिन
शुक्र17:0218:08दिन
बुध18:0819:13दिन
चंद्र19:1320:08रात
शनि20:0821:02रात
गुरु21:0221:57रात
मंगल21:5722:51रात
सूर्य22:5123:46रात
शुक्र23:4600:41रात
बुध00:4101:35रात
चंद्र01:3502:30रात
शनि02:3003:24रात
गुरु03:2404:19रात
मंगल04:1905:14रात
सूर्य05:1406:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जुल॰ 2028श्रावण अमावस्याअमावस्या
25 जुल॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 अग॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2559° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।