14 जनवरी 2029 को पुणे का पंचांग

रविवार, 14 जनवरी 2029, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 14 जनवरी 2029 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (22:54 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (15:37 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 18:17 पर है। राहुकाल 16:54 से 18:17 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 18:17
रात 07:09 तक
तिथि
अमावस्या, 22:54 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 15:37 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जनवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
अमावस्या 22:54 तक
शुक्ल प्रतिपदा 23:30, 15 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 16:38, 15 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 09:27 तक
हर्षण 08:30, 15 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 10:47 तक
नाग 22:54 तक
किंस्तुघ्न 11:08, 15 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 21:50 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
18:17
चंद्रोदय
06:41
चंद्रास्त
18:03
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:21 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
16:54 – 18:17
यमगंड
12:43 – 14:07
गुलिक काल
15:30 – 16:54

14 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:09 – 08:33टालें
चर08:33 – 09:56सामान्य
लाभ09:56 – 11:20शुभ
अमृत11:20 – 12:43शुभ
काल12:43 – 14:07टालें
शुभ14:07 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 16:54टालें
उद्वेग16:54 – 18:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:17 – 19:54शुभ
अमृत19:54 – 21:30शुभ
चर21:30 – 23:07सामान्य
रोग23:07 – 00:43टालें
काल00:43 – 02:20टालें
लाभ02:20 – 03:56शुभ
उद्वेग03:56 – 05:33टालें
शुभ05:33 – 07:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0908:05दिन
शुक्र08:0509:01दिन
बुध09:0109:56दिन
चंद्र09:5610:52दिन
शनि10:5211:48दिन
गुरु11:4812:43दिन
मंगल12:4313:39दिन
सूर्य13:3914:35दिन
शुक्र14:3515:30दिन
बुध15:3016:26दिन
चंद्र16:2617:22दिन
शनि17:2218:17दिन
गुरु18:1719:22रात
मंगल19:2220:26रात
सूर्य20:2621:30रात
शुक्र21:3022:35रात
बुध22:3523:39रात
चंद्र23:3900:43रात
शनि00:4301:48रात
गुरु01:4802:52रात
मंगल02:5203:56रात
सूर्य03:5605:01रात
शुक्र05:0106:05रात
बुध06:0507:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2627° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।