12 दिसंबर 2029 को पुणे का पंचांग

बुधवार, 12 दिसंबर 2029, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 12 दिसंबर 2029 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (10:39 तक), नक्षत्र शतभिषा (10:18 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 12:28 से 13:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 17:59
रात 06:57 तक
तिथि
सप्तमी, 10:39 तक
अष्टमी
नक्षत्र
शतभिषा, 10:18 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 10:39 तक
शुक्ल अष्टमी 12:09, 13 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 10:18 तक
पूर्वा भाद्रपद 12:18, 13 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 17:09 तक
सिद्धि 17:17, 13 दिस॰ तक
करण
वणिज 10:39 तक
विष्टि (भद्रा) 23:19 तक
बव 12:09, 13 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:44, 13 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
12:08
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
12:06 – 12:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:28 – 13:51
यमगंड
08:19 – 09:42
गुलिक काल
11:05 – 12:28

12 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:57 – 08:19शुभ
अमृत08:19 – 09:42शुभ
काल09:42 – 11:05टालें
शुभ11:05 – 12:28शुभ
रोग12:28 – 13:51टालें
उद्वेग13:51 – 15:13टालें
चर15:13 – 16:36सामान्य
लाभ16:36 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:59 – 19:36टालें
शुभ19:36 – 21:13शुभ
अमृत21:13 – 22:51शुभ
चर22:51 – 00:28सामान्य
रोग00:28 – 02:05टालें
काल02:05 – 03:43टालें
लाभ03:43 – 05:20शुभ
उद्वेग05:20 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5707:52दिन
चंद्र07:5208:47दिन
शनि08:4709:42दिन
गुरु09:4210:37दिन
मंगल10:3711:33दिन
सूर्य11:3312:28दिन
शुक्र12:2813:23दिन
बुध13:2314:18दिन
चंद्र14:1815:13दिन
शनि15:1316:09दिन
गुरु16:0917:04दिन
मंगल17:0417:59दिन
सूर्य17:5919:04रात
शुक्र19:0420:09रात
बुध20:0921:13रात
चंद्र21:1322:18रात
शनि22:1823:23रात
गुरु23:2300:28रात
मंगल00:2801:33रात
सूर्य01:3302:38रात
शुक्र02:3803:43रात
बुध03:4304:48रात
चंद्र04:4805:52रात
शनि05:5206:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2754° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।