4 जनवरी 2030 को पुणे का पंचांग

शुक्रवार, 4 जनवरी 2030, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 4 जनवरी 2030 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (08:19 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (20:23 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 11:16 से 12:39 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 18:11
रात 07:08 तक
तिथि
प्रतिपदा, 06:09 तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 20:23 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जनवरी 2030 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 08:19 तक
शुक्ल प्रतिपदा 06:09, 5 जन॰ तक
शुक्ल द्वितीया 04:29, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 19:09, 5 जन॰ तक
योग
ध्रुव 09:53 तक
व्याघातअशुभ 06:55, 5 जन॰ तक
हर्षण 04:21, 6 जन॰ तक
करण
नाग 08:19 तक
किंस्तुघ्न 19:11 तक
बव 06:09, 5 जन॰ तक
बालव 17:15, 5 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 02:02, 5 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
07:06
चंद्रास्त
18:34
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:01

अशुभ समय

राहुकाल
11:16 – 12:39
यमगंड
15:25 – 16:48
गुलिक काल
08:30 – 09:53

4 जनवरी 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:07 – 08:30सामान्य
लाभ08:30 – 09:53शुभ
अमृत09:53 – 11:16शुभ
काल11:16 – 12:39टालें
शुभ12:39 – 14:02शुभ
रोग14:02 – 15:25टालें
उद्वेग15:25 – 16:48टालें
चर16:48 – 18:11सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:11 – 19:48टालें
काल19:48 – 21:25टालें
लाभ21:25 – 23:02शुभ
उद्वेग23:02 – 00:39टालें
शुभ00:39 – 02:16शुभ
अमृत02:16 – 03:53शुभ
चर03:53 – 05:30सामान्य
रोग05:30 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:0708:03दिन
बुध08:0308:58दिन
चंद्र08:5809:53दिन
शनि09:5310:48दिन
गुरु10:4811:44दिन
मंगल11:4412:39दिन
सूर्य12:3913:34दिन
शुक्र13:3414:30दिन
बुध14:3015:25दिन
चंद्र15:2516:20दिन
शनि16:2017:15दिन
गुरु17:1518:11दिन
मंगल18:1119:15रात
सूर्य19:1520:20रात
शुक्र20:2021:25रात
बुध21:2522:30रात
चंद्र22:3023:34रात
शनि23:3400:39रात
गुरु00:3901:44रात
मंगल01:4402:49रात
सूर्य02:4903:53रात
शुक्र03:5304:58रात
बुध04:5806:03रात
चंद्र06:0307:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2030माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2763° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।