24 जनवरी 2026 को पुरुलिया का पंचांग

शनिवार, 24 जनवरी 2026, पुरुलिया, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 24 जनवरी 2026 को पुरुलिया में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (00:40, 25 जन॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (14:16 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 09:11 से 10:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:26
रात 06:27 तक
तिथि
षष्ठी, 00:40 तक
सप्तमी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 14:16 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 00:40, 25 जन॰ तक
शुक्ल सप्तमी 23:10, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
रेवती 13:35, 25 जन॰ तक
योग
शिव 14:01 तक
सिद्ध 11:45, 25 जन॰ तक
करण
कौलव 13:16 तक
तैतिल 00:40, 25 जन॰ तक
गर 11:58, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
09:48
चंद्रास्त
22:36
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
09:11 – 10:34
यमगंड
13:19 – 14:41
गुलिक काल
06:27 – 07:49

24 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:27 – 07:49टालें
शुभ07:49 – 09:11शुभ
रोग09:11 – 10:34टालें
उद्वेग10:34 – 11:56टालें
चर11:56 – 13:19सामान्य
लाभ13:19 – 14:41शुभ
अमृत14:41 – 16:03शुभ
काल16:03 – 17:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:26 – 19:03शुभ
उद्वेग19:03 – 20:41टालें
शुभ20:41 – 22:18शुभ
अमृत22:18 – 23:56शुभ
चर23:56 – 01:34सामान्य
रोग01:34 – 03:11टालें
काल03:11 – 04:49टालें
लाभ04:49 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:2707:22दिन
गुरु07:2208:17दिन
मंगल08:1709:11दिन
सूर्य09:1110:06दिन
शुक्र10:0611:01दिन
बुध11:0111:56दिन
चंद्र11:5612:51दिन
शनि12:5113:46दिन
गुरु13:4614:41दिन
मंगल14:4115:36दिन
सूर्य15:3616:31दिन
शुक्र16:3117:26दिन
बुध17:2618:31रात
चंद्र18:3119:36रात
शनि19:3620:41रात
गुरु20:4121:46रात
मंगल21:4622:51रात
सूर्य22:5123:56रात
शुक्र23:5601:01रात
बुध01:0102:06रात
चंद्र02:0603:11रात
शनि03:1104:16रात
गुरु04:1605:21रात
मंगल05:2106:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुरुलिया में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2211° (लाहिड़ी)। समय पुरुलिया (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।