19 नवंबर 2026 को पुरुलिया का पंचांग

गुरुवार, 19 नवंबर 2026, पुरुलिया, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 19 नवंबर 2026 को पुरुलिया में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (07:06 तक), नक्षत्र शतभिषा (06:10 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 16:58 पर है। राहुकाल 12:51 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 16:58
रात 06:01 तक
तिथि
दशमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 नवंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल नवमी 07:06 तक
शुक्ल दशमी 07:16, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:10 तक
पूर्वा भाद्रपद 06:56, 20 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 07:42 तक
हर्षण 06:40, 20 नव॰ तक
करण
कौलव 07:06 तक
तैतिल 19:18 तक
गर 07:16, 20 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 00:50, 20 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
16:58
चंद्रोदय
13:09
चंद्रास्त
00:30
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:07 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
12:51 – 14:14
यमगंड
06:00 – 07:23
गुलिक काल
08:45 – 10:07

19 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:00 – 07:23शुभ
रोग07:23 – 08:45टालें
उद्वेग08:45 – 10:07टालें
चर10:07 – 11:29सामान्य
लाभ11:29 – 12:51शुभ
अमृत12:51 – 14:14शुभ
काल14:14 – 15:36टालें
शुभ15:36 – 16:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:58 – 18:36शुभ
चर18:36 – 20:14सामान्य
रोग20:14 – 21:52टालें
काल21:52 – 23:30टालें
लाभ23:30 – 01:07शुभ
उद्वेग01:07 – 02:45टालें
शुभ02:45 – 04:23शुभ
अमृत04:23 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0006:55दिन
मंगल06:5507:50दिन
सूर्य07:5008:45दिन
शुक्र08:4509:40दिन
बुध09:4010:34दिन
चंद्र10:3411:29दिन
शनि11:2912:24दिन
गुरु12:2413:19दिन
मंगल13:1914:14दिन
सूर्य14:1415:09दिन
शुक्र15:0916:03दिन
बुध16:0316:58दिन
चंद्र16:5818:03रात
शनि18:0319:09रात
गुरु19:0920:14रात
मंगल20:1421:19रात
सूर्य21:1922:24रात
शुक्र22:2423:30रात
बुध23:3000:35रात
चंद्र00:3501:40रात
शनि01:4002:45रात
गुरु02:4503:51रात
मंगल03:5104:56रात
सूर्य04:5606:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पुरुलिया में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2326° (लाहिड़ी)। समय पुरुलिया (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।