23 फ़रवरी 2025 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 23 फ़रवरी 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 23 फ़रवरी 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (13:56 तक), नक्षत्र मूल (18:42 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 17:03 से 18:29 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 18:29
रात 07:00 तक
तिथि
दशमी, 13:56 तक
एकादशी
नक्षत्र
मूल, 18:42 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 13:56 तक
कृष्ण एकादशी 13:45, 24 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मूल 18:42 तक
पूर्वाषाढ़ा 18:59, 24 फ़र॰ तक
योग
वज्रअशुभ 11:18 तक
सिद्धि 10:05, 24 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:56 तक
बव 01:56, 24 फ़र॰ तक
बालव 13:45, 24 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
03:20
चंद्रास्त
13:36
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
17:03 – 18:29
यमगंड
12:45 – 14:11
गुलिक काल
15:37 – 17:03

23 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:01 – 08:27टालें
चर08:27 – 09:53सामान्य
लाभ09:53 – 11:19शुभ
अमृत11:19 – 12:45शुभ
काल12:45 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 17:03टालें
उद्वेग17:03 – 18:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:29 – 20:03शुभ
अमृत20:03 – 21:37शुभ
चर21:37 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:44टालें
काल00:44 – 02:18टालें
लाभ02:18 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:26टालें
शुभ05:26 – 07:00शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0107:58दिन
शुक्र07:5808:55दिन
बुध08:5509:53दिन
चंद्र09:5310:50दिन
शनि10:5011:47दिन
गुरु11:4712:45दिन
मंगल12:4513:42दिन
सूर्य13:4214:39दिन
शुक्र14:3915:37दिन
बुध15:3716:34दिन
चंद्र16:3417:32दिन
शनि17:3218:29दिन
गुरु18:2919:32रात
मंगल19:3220:34रात
सूर्य20:3421:37रात
शुक्र21:3722:39रात
बुध22:3923:42रात
चंद्र23:4200:44रात
शनि00:4401:47रात
गुरु01:4702:49रात
मंगल02:4903:52रात
सूर्य03:5204:55रात
शुक्र04:5505:57रात
बुध05:5707:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2083° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।