29 नवंबर 2025 को पुष्कर का पंचांग

शनिवार, 29 नवंबर 2025, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 नवंबर 2025 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (23:15 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (02:22, 30 नव॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:01 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 09:40 से 11:00 तक है।

दिन और रात
दिन 07:01 – 17:38
रात 07:01 तक
तिथि
नवमी, 23:15 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 02:22 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 23:15 तक
शुक्ल दशमी 21:29, 30 नव॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 02:22, 30 नव॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 01:11, 1 दिस॰ तक
योग
हर्षण 09:27 तक
वज्रअशुभ 07:12, 30 नव॰ तक
करण
बालव 11:51 तक
कौलव 23:15 तक
तैतिल 10:28, 30 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 20:33 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:01
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
13:28
चंद्रास्त
00:43
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
09:40 – 11:00
यमगंड
13:39 – 14:59
गुलिक काल
07:01 – 08:20

29 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:01 – 08:20टालें
शुभ08:20 – 09:40शुभ
रोग09:40 – 11:00टालें
उद्वेग11:00 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:39सामान्य
लाभ13:39 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:19शुभ
काल16:19 – 17:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:38 – 19:19शुभ
उद्वेग19:19 – 20:59टालें
शुभ20:59 – 22:39शुभ
अमृत22:39 – 00:20शुभ
चर00:20 – 02:00सामान्य
रोग02:00 – 03:41टालें
काल03:41 – 05:21टालें
लाभ05:21 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0107:54दिन
गुरु07:5408:47दिन
मंगल08:4709:40दिन
सूर्य09:4010:33दिन
शुक्र10:3311:26दिन
बुध11:2612:20दिन
चंद्र12:2013:13दिन
शनि13:1314:06दिन
गुरु14:0614:59दिन
मंगल14:5915:52दिन
सूर्य15:5216:45दिन
शुक्र16:4517:38दिन
बुध17:3818:45रात
चंद्र18:4519:52रात
शनि19:5220:59रात
गुरु20:5922:06रात
मंगल22:0623:13रात
सूर्य23:1300:20रात
शुक्र00:2001:27रात
बुध01:2702:34रात
चंद्र02:3403:41रात
शनि03:4104:48रात
गुरु04:4805:55रात
मंगल05:5507:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2190° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।