4 फ़रवरी 2026 को पुष्कर का पंचांग

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (00:10, 5 फ़र॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (22:13 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 12:45 से 14:08 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 18:16
रात 07:14 तक
तिथि
तृतीया, 00:10 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 22:13 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 00:10, 5 फ़र॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 00:22, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 22:57, 5 फ़र॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 01:04, 5 फ़र॰ तक
सुकर्मा 00:04, 6 फ़र॰ तक
करण
वणिज 12:20 तक
विष्टि (भद्रा) 00:10, 5 फ़र॰ तक
बव 12:10, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 04:20, 5 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
20:49
चंद्रास्त
08:44
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:31 – 06:23
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:07 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:45 – 14:08
यमगंड
08:37 – 10:00
गुलिक काल
11:23 – 12:45

4 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:15 – 08:37शुभ
अमृत08:37 – 10:00शुभ
काल10:00 – 11:23टालें
शुभ11:23 – 12:45शुभ
रोग12:45 – 14:08टालें
उद्वेग14:08 – 15:31टालें
चर15:31 – 16:53सामान्य
लाभ16:53 – 18:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:16 – 19:53टालें
शुभ19:53 – 21:30शुभ
अमृत21:30 – 23:08शुभ
चर23:08 – 00:45सामान्य
रोग00:45 – 02:22टालें
काल02:22 – 04:00टालें
लाभ04:00 – 05:37शुभ
उद्वेग05:37 – 07:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:1508:10दिन
चंद्र08:1009:05दिन
शनि09:0510:00दिन
गुरु10:0010:55दिन
मंगल10:5511:50दिन
सूर्य11:5012:45दिन
शुक्र12:4513:40दिन
बुध13:4014:36दिन
चंद्र14:3615:31दिन
शनि15:3116:26दिन
गुरु16:2617:21दिन
मंगल17:2118:16दिन
सूर्य18:1619:21रात
शुक्र19:2120:26रात
बुध20:2621:30रात
चंद्र21:3022:35रात
शनि22:3523:40रात
गुरु23:4000:45रात
मंगल00:4501:50रात
सूर्य01:5002:55रात
शुक्र02:5504:00रात
बुध04:0005:04रात
चंद्र05:0406:09रात
शनि06:0907:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2216° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।