20 फ़रवरी 2028 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 20 फ़रवरी 2028, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 20 फ़रवरी 2028 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (05:46, 21 फ़र॰ तक), नक्षत्र मूल (17:14 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:04 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 17:01 से 18:27 तक है।

दिन और रात
दिन 07:04 – 18:27
रात 07:03 तक
तिथि
एकादशी, 05:46 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मूल, 17:14 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 05:46, 21 फ़र॰ तक
कृष्ण द्वादशी 08:08, 22 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मूल 17:14 तक
पूर्वाषाढ़ा 19:53, 21 फ़र॰ तक
योग
वज्रअशुभ 16:26 तक
सिद्धि 17:00, 21 फ़र॰ तक
करण
बव 16:44 तक
बालव 05:46, 21 फ़र॰ तक
कौलव 18:55, 21 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:04
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
03:34
चंद्रास्त
14:03
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
12:22 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
17:01 – 18:27
यमगंड
12:45 – 14:11
गुलिक काल
15:36 – 17:01

20 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:04 – 08:29टालें
चर08:29 – 09:54सामान्य
लाभ09:54 – 11:20शुभ
अमृत11:20 – 12:45शुभ
काल12:45 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:36शुभ
रोग15:36 – 17:01टालें
उद्वेग17:01 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:27 – 20:01शुभ
अमृत20:01 – 21:36शुभ
चर21:36 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:45टालें
काल00:45 – 02:19टालें
लाभ02:19 – 03:54शुभ
उद्वेग03:54 – 05:28टालें
शुभ05:28 – 07:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0408:01दिन
शुक्र08:0108:58दिन
बुध08:5809:54दिन
चंद्र09:5410:51दिन
शनि10:5111:48दिन
गुरु11:4812:45दिन
मंगल12:4513:42दिन
सूर्य13:4214:39दिन
शुक्र14:3915:36दिन
बुध15:3616:33दिन
चंद्र16:3317:30दिन
शनि17:3018:27दिन
गुरु18:2719:30रात
मंगल19:3020:33रात
सूर्य20:3321:36रात
शुक्र21:3622:39रात
बुध22:3923:42रात
चंद्र23:4200:45रात
शनि00:4501:48रात
गुरु01:4802:51रात
मंगल02:5103:54रात
सूर्य03:5404:57रात
शुक्र04:5706:00रात
बुध06:0007:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2501° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।