26 नवंबर 2028 को पुष्कर का पंचांग

रविवार, 26 नवंबर 2028, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 नवंबर 2028 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (23:59 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (08:58 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 17:39 पर है। राहुकाल 16:19 से 17:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 17:39
रात 06:59 तक
तिथि
दशमी, 23:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 नवंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 23:59 तक
शुक्ल एकादशी 02:18, 28 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 11:51, 27 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 21:07 तक
सिद्धि 21:49, 27 नव॰ तक
करण
तैतिल 10:45 तक
गर 23:59 तक
वणिज 13:11, 27 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
17:39
चंद्रोदय
13:51
चंद्रास्त
01:44
दिनमान
10h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 06:05
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
16:19 – 17:39
यमगंड
12:19 – 13:39
गुलिक काल
14:59 – 16:19

26 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:59 – 08:19टालें
चर08:19 – 09:39सामान्य
लाभ09:39 – 10:59शुभ
अमृत10:59 – 12:19शुभ
काल12:19 – 13:39टालें
शुभ13:39 – 14:59शुभ
रोग14:59 – 16:19टालें
उद्वेग16:19 – 17:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:39 – 19:19शुभ
अमृत19:19 – 20:59शुभ
चर20:59 – 22:39सामान्य
रोग22:39 – 00:19टालें
काल00:19 – 01:59टालें
लाभ01:59 – 03:39शुभ
उद्वेग03:39 – 05:19टालें
शुभ05:19 – 06:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5907:52दिन
शुक्र07:5208:45दिन
बुध08:4509:39दिन
चंद्र09:3910:32दिन
शनि10:3211:25दिन
गुरु11:2512:19दिन
मंगल12:1913:12दिन
सूर्य13:1214:05दिन
शुक्र14:0514:59दिन
बुध14:5915:52दिन
चंद्र15:5216:45दिन
शनि16:4517:39दिन
गुरु17:3918:45रात
मंगल18:4519:52रात
सूर्य19:5220:59रात
शुक्र20:5922:05रात
बुध22:0523:12रात
चंद्र23:1200:19रात
शनि00:1901:26रात
गुरु01:2602:32रात
मंगल02:3203:39रात
सूर्य03:3904:46रात
शुक्र04:4605:53रात
बुध05:5306:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2608° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।