9 मई 2029 को पुष्कर का पंचांग

बुधवार, 9 मई 2029, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 मई 2029 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (10:02 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (06:28, 10 मई तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 12:28 से 14:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 19:08
रात 05:47 तक
तिथि
एकादशी, 10:02 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 मई 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 10:02 तक
कृष्ण द्वादशी 12:30, 10 मई तक
नक्षत्र
योग
वैधृतिअशुभ 07:52 तक
विष्कंभअशुभ 08:50, 10 मई तक
करण
बालव 10:02 तक
कौलव 23:16 तक
तैतिल 12:30, 10 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
02:59
चंद्रास्त
15:38
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:55 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:28 – 14:08
यमगंड
07:28 – 09:08
गुलिक काल
10:48 – 12:28

9 मई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:48 – 07:28शुभ
अमृत07:28 – 09:08शुभ
काल09:08 – 10:48टालें
शुभ10:48 – 12:28शुभ
रोग12:28 – 14:08टालें
उद्वेग14:08 – 15:48टालें
चर15:48 – 17:28सामान्य
लाभ17:28 – 19:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:08 – 20:28टालें
शुभ20:28 – 21:48शुभ
अमृत21:48 – 23:08शुभ
चर23:08 – 00:28सामान्य
रोग00:28 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:07टालें
लाभ03:07 – 04:27शुभ
उद्वेग04:27 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4806:55दिन
चंद्र06:5508:01दिन
शनि08:0109:08दिन
गुरु09:0810:15दिन
मंगल10:1511:21दिन
सूर्य11:2112:28दिन
शुक्र12:2813:35दिन
बुध13:3514:41दिन
चंद्र14:4115:48दिन
शनि15:4816:55दिन
गुरु16:5518:01दिन
मंगल18:0119:08दिन
सूर्य19:0820:01रात
शुक्र20:0120:54रात
बुध20:5421:48रात
चंद्र21:4822:41रात
शनि22:4123:34रात
गुरु23:3400:28रात
मंगल00:2801:21रात
सूर्य01:2102:14रात
शुक्र02:1403:07रात
बुध03:0704:01रात
चंद्र04:0104:54रात
शनि04:5405:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
15 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मई 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 मई 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 मई 2029वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
31 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जून 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2671° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।