19 अक्टूबर 2029 को पुष्कर का पंचांग

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2029, पुष्कर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2029 को पुष्कर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (08:18 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (23:23 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 10:50 से 12:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:59
रात 06:33 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 23:23 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 08:18 तक
शुक्ल त्रयोदशी 10:18, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 02:01, 21 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 06:51 तक
ध्रुव 07:19, 20 अक्टू॰ तक
करण
बालव 08:18 तक
कौलव 21:16 तक
तैतिल 10:18, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 16:45 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
16:04
चंद्रास्त
03:47
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:50 – 12:16
यमगंड
15:08 – 16:34
गुलिक काल
07:59 – 09:24

19 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:33 – 07:59सामान्य
लाभ07:59 – 09:24शुभ
अमृत09:24 – 10:50शुभ
काल10:50 – 12:16टालें
शुभ12:16 – 13:42शुभ
रोग13:42 – 15:08टालें
उद्वेग15:08 – 16:34टालें
चर16:34 – 17:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:59 – 19:34टालें
काल19:34 – 21:08टालें
लाभ21:08 – 22:42शुभ
उद्वेग22:42 – 00:16टालें
शुभ00:16 – 01:51शुभ
अमृत01:51 – 03:25शुभ
चर03:25 – 04:59सामान्य
रोग04:59 – 06:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3307:30दिन
बुध07:3008:27दिन
चंद्र08:2709:24दिन
शनि09:2410:22दिन
गुरु10:2211:19दिन
मंगल11:1912:16दिन
सूर्य12:1613:13दिन
शुक्र13:1314:11दिन
बुध14:1115:08दिन
चंद्र15:0816:05दिन
शनि16:0517:02दिन
गुरु17:0217:59दिन
मंगल17:5919:02रात
सूर्य19:0220:05रात
शुक्र20:0521:08रात
बुध21:0822:11रात
चंद्र22:1123:14रात
शनि23:1400:16रात
गुरु00:1601:19रात
मंगल01:1902:22रात
सूर्य02:2203:25रात
शुक्र03:2504:28रात
बुध04:2805:30रात
चंद्र05:3006:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां पुष्कर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2733° (लाहिड़ी)। समय पुष्कर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।