3 मार्च 2026 को रामेश्वरम का पंचांग

मंगलवार, 3 मार्च 2026, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 3 मार्च 2026 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (17:07 तक), नक्षत्र मघा (07:31 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 15:24 से 16:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 18:23
रात 06:25 तक
तिथि
पूर्णिमा, 17:07 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
पूर्णिमा 17:07 तक
कृष्ण प्रतिपदा 16:49, 4 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 07:31 तक
पूर्वा फाल्गुनी 07:39, 4 मार्च तक
योग
सुकर्मा 10:24 तक
धृति 08:52, 4 मार्च तक
करण
बव 17:07 तक
बालव 04:54, 4 मार्च तक
कौलव 16:49, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
18:22
चंद्रास्त
06:09
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
15:24 – 16:53
यमगंड
09:25 – 10:55
गुलिक काल
12:24 – 13:54

3 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:25 – 07:55टालें
उद्वेग07:55 – 09:25टालें
चर09:25 – 10:55सामान्य
लाभ10:55 – 12:24शुभ
अमृत12:24 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:24टालें
शुभ15:24 – 16:53शुभ
रोग16:53 – 18:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:23 – 19:53टालें
लाभ19:53 – 21:24शुभ
उद्वेग21:24 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:24शुभ
अमृत00:24 – 01:54शुभ
चर01:54 – 03:24सामान्य
रोग03:24 – 04:55टालें
काल04:55 – 06:25टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2507:25दिन
सूर्य07:2508:25दिन
शुक्र08:2509:25दिन
बुध09:2510:25दिन
चंद्र10:2511:24दिन
शनि11:2412:24दिन
गुरु12:2413:24दिन
मंगल13:2414:24दिन
सूर्य14:2415:24दिन
शुक्र15:2416:23दिन
बुध16:2317:23दिन
चंद्र17:2318:23दिन
शनि18:2319:23रात
गुरु19:2320:23रात
मंगल20:2321:24रात
सूर्य21:2422:24रात
शुक्र22:2423:24रात
बुध23:2400:24रात
चंद्र00:2401:24रात
शनि01:2402:24रात
गुरु02:2403:24रात
मंगल03:2404:25रात
सूर्य04:2505:25रात
शुक्र05:2506:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।