28 सितंबर 2026 को रामेश्वरम का पंचांग

सोमवार, 28 सितंबर 2026, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 28 सितंबर 2026 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (19:14 तक), नक्षत्र रेवती (10:16 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 07:31 से 09:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:05
रात 06:01 तक
तिथि
द्वितीया, 19:14 तक
तृतीया
नक्षत्र
रेवती, 10:16 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 19:14 तक
कृष्ण तृतीया 17:10, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 10:16 तक
अश्विनी 09:03, 29 सित॰ तक
योग
ध्रुव 08:53 तक
व्याघातअशुभ 06:13, 29 सित॰ तक
करण
तैतिल 08:09 तक
गर 19:14 तक
वणिज 06:14, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
मीन 10:16 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
19:16
चंद्रास्त
07:09
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
07:31 – 09:02
यमगंड
10:32 – 12:03
गुलिक काल
13:33 – 15:04

28 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:01 – 07:31शुभ
काल07:31 – 09:02टालें
शुभ09:02 – 10:32शुभ
रोग10:32 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:33टालें
चर13:33 – 15:04सामान्य
लाभ15:04 – 16:34शुभ
अमृत16:34 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:05 – 19:34सामान्य
रोग19:34 – 21:04टालें
काल21:04 – 22:33टालें
लाभ22:33 – 00:03शुभ
उद्वेग00:03 – 01:32टालें
शुभ01:32 – 03:02शुभ
अमृत03:02 – 04:31शुभ
चर04:31 – 06:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0107:01दिन
शनि07:0108:02दिन
गुरु08:0209:02दिन
मंगल09:0210:02दिन
सूर्य10:0211:03दिन
शुक्र11:0312:03दिन
बुध12:0313:03दिन
चंद्र13:0314:04दिन
शनि14:0415:04दिन
गुरु15:0416:04दिन
मंगल16:0417:05दिन
सूर्य17:0518:05दिन
शुक्र18:0519:05रात
बुध19:0520:04रात
चंद्र20:0421:04रात
शनि21:0422:04रात
गुरु22:0423:03रात
मंगल23:0300:03रात
सूर्य00:0301:03रात
शुक्र01:0302:02रात
बुध02:0203:02रात
चंद्र03:0204:02रात
शनि04:0205:01रात
गुरु05:0106:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2306° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।