20 अक्टूबर 2026 को रामेश्वरम का पंचांग

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (12:50 तक), नक्षत्र श्रवण (18:02 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:00 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 14:55 से 16:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:00 – 17:54
रात 06:01 तक
तिथि
नवमी, 12:50 तक
दशमी
नक्षत्र
श्रवण, 18:02 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 12:50 तक
शुक्ल दशमी 14:12, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:02 तक
धनिष्ठा 19:48, 21 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 00:50, 21 अक्टू॰ तक
गंडअशुभ 00:33, 22 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:50 तक
तैतिल 01:36, 21 अक्टू॰ तक
गर 14:12, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:00
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
13:42
चंद्रास्त
00:52
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
14:55 – 16:24
यमगंड
08:59 – 10:28
गुलिक काल
11:57 – 13:26

20 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:00 – 07:30टालें
उद्वेग07:30 – 08:59टालें
चर08:59 – 10:28सामान्य
लाभ10:28 – 11:57शुभ
अमृत11:57 – 13:26शुभ
काल13:26 – 14:55टालें
शुभ14:55 – 16:24शुभ
रोग16:24 – 17:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:54 – 19:24टालें
लाभ19:24 – 20:55शुभ
उद्वेग20:55 – 22:26टालें
शुभ22:26 – 23:57शुभ
अमृत23:57 – 01:28शुभ
चर01:28 – 02:59सामान्य
रोग02:59 – 04:30टालें
काल04:30 – 06:01टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0007:00दिन
सूर्य07:0007:59दिन
शुक्र07:5908:59दिन
बुध08:5909:58दिन
चंद्र09:5810:58दिन
शनि10:5811:57दिन
गुरु11:5712:56दिन
मंगल12:5613:56दिन
सूर्य13:5614:55दिन
शुक्र14:5515:55दिन
बुध15:5516:54दिन
चंद्र16:5417:54दिन
शनि17:5418:54रात
गुरु18:5419:55रात
मंगल19:5520:55रात
सूर्य20:5521:56रात
शुक्र21:5622:56रात
बुध22:5623:57रात
चंद्र23:5700:58रात
शनि00:5801:58रात
गुरु01:5802:59रात
मंगल02:5903:59रात
सूर्य03:5905:00रात
शुक्र05:0006:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2314° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।