25 जनवरी 2029 को रामेश्वरम का पंचांग

गुरुवार, 25 जनवरी 2029, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 25 जनवरी 2029 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (16:50 तक), नक्षत्र कृत्तिका (13:58 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 13:52 से 15:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 18:15
रात 06:34 तक
तिथि
दशमी, 16:50 तक
एकादशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 13:58 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जनवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 16:50 तक
शुक्ल एकादशी 17:13, 26 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 14:59, 26 जन॰ तक
योग
शुक्ल 11:31 तक
ब्रह्म 10:47, 26 जन॰ तक
करण
गर 16:50 तक
वणिज 05:08, 26 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:13, 26 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
13:42
चंद्रास्त
01:49
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
13:52 – 15:20
यमगंड
06:34 – 08:02
गुलिक काल
09:29 – 10:57

25 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:34 – 08:02शुभ
रोग08:02 – 09:29टालें
उद्वेग09:29 – 10:57टालें
चर10:57 – 12:25सामान्य
लाभ12:25 – 13:52शुभ
अमृत13:52 – 15:20शुभ
काल15:20 – 16:48टालें
शुभ16:48 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:15 – 19:48शुभ
चर19:48 – 21:20सामान्य
रोग21:20 – 22:52टालें
काल22:52 – 00:25टालें
लाभ00:25 – 01:57शुभ
उद्वेग01:57 – 03:29टालें
शुभ03:29 – 05:02शुभ
अमृत05:02 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3407:32दिन
मंगल07:3208:31दिन
सूर्य08:3109:29दिन
शुक्र09:2910:28दिन
बुध10:2811:26दिन
चंद्र11:2612:25दिन
शनि12:2513:23दिन
गुरु13:2314:22दिन
मंगल14:2215:20दिन
सूर्य15:2016:18दिन
शुक्र16:1817:17दिन
बुध17:1718:15दिन
चंद्र18:1519:17रात
शनि19:1720:19रात
गुरु20:1921:20रात
मंगल21:2022:22रात
सूर्य22:2223:23रात
शुक्र23:2300:25रात
बुध00:2501:26रात
चंद्र01:2602:28रात
शनि02:2803:29रात
गुरु03:2904:31रात
मंगल04:3105:32रात
सूर्य05:3206:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2631° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।