10 नवंबर 2027 को रांची का पंचांग

बुधवार, 10 नवंबर 2027, रांची, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 10 नवंबर 2027 को रांची में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (09:11 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (07:01, 11 नव॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 17:05 पर है। राहुकाल 11:32 से 12:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 17:05
रात 05:59 तक
तिथि
एकादशी, 09:11 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 09:11 तक
शुक्ल द्वादशी 10:07, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 07:01, 11 नव॰ तक
योग
हर्षण 23:40 तक
वज्रअशुभ 22:57, 11 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:11 तक
बव 21:44 तक
बालव 10:07, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
17:05
चंद्रोदय
14:25
चंद्रास्त
02:15
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:32 – 12:55
यमगंड
07:22 – 08:45
गुलिक काल
10:09 – 11:32

10 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:59 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 08:45शुभ
काल08:45 – 10:09टालें
शुभ10:09 – 11:32शुभ
रोग11:32 – 12:55टालें
उद्वेग12:55 – 14:19टालें
चर14:19 – 15:42सामान्य
लाभ15:42 – 17:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:05 – 18:42टालें
शुभ18:42 – 20:19शुभ
अमृत20:19 – 21:56शुभ
चर21:56 – 23:32सामान्य
रोग23:32 – 01:09टालें
काल01:09 – 02:46टालें
लाभ02:46 – 04:23शुभ
उद्वेग04:23 – 05:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5906:54दिन
चंद्र06:5407:50दिन
शनि07:5008:45दिन
गुरु08:4509:41दिन
मंगल09:4110:36दिन
सूर्य10:3611:32दिन
शुक्र11:3212:28दिन
बुध12:2813:23दिन
चंद्र13:2314:19दिन
शनि14:1915:14दिन
गुरु15:1416:10दिन
मंगल16:1017:05दिन
सूर्य17:0518:10रात
शुक्र18:1019:14रात
बुध19:1420:19रात
चंद्र20:1921:23रात
शनि21:2322:28रात
गुरु22:2823:32रात
मंगल23:3200:37रात
सूर्य00:3701:41रात
शुक्र01:4102:46रात
बुध02:4603:50रात
चंद्र03:5004:55रात
शनि04:5505:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रांची में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2462° (लाहिड़ी)। समय रांची (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।