22 मार्च 2025 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 22 मार्च 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 22 मार्च 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (02:53, 23 मार्च तक), नक्षत्र मूल (00:53, 23 मार्च तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 08:57 से 10:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 18:05
रात 05:54 तक
तिथि
अष्टमी, 02:53 तक
नवमी
नक्षत्र
मूल, 00:53 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मार्च 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:53, 23 मार्च तक
कृष्ण नवमी 03:08, 24 मार्च तक
नक्षत्र
मूल 00:53, 23 मार्च तक
पूर्वाषाढ़ा 01:48, 24 मार्च तक
योग
व्यतीपातअशुभ 16:06 तक
वरीयान 15:28, 23 मार्च तक
करण
बालव 14:29 तक
कौलव 02:53, 23 मार्च तक
तैतिल 15:07, 23 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
00:29
चंद्रास्त
10:54
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
08:57 – 10:28
यमगंड
13:31 – 15:02
गुलिक काल
05:55 – 07:26

22 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:55 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 08:57शुभ
रोग08:57 – 10:28टालें
उद्वेग10:28 – 12:00टालें
चर12:00 – 13:31सामान्य
लाभ13:31 – 15:02शुभ
अमृत15:02 – 16:33शुभ
काल16:33 – 18:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:05 – 19:33शुभ
उद्वेग19:33 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:30शुभ
अमृत22:30 – 23:59शुभ
चर23:59 – 01:28सामान्य
रोग01:28 – 02:56टालें
काल02:56 – 04:25टालें
लाभ04:25 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5506:55दिन
गुरु06:5507:56दिन
मंगल07:5608:57दिन
सूर्य08:5709:58दिन
शुक्र09:5810:59दिन
बुध10:5912:00दिन
चंद्र12:0013:00दिन
शनि13:0014:01दिन
गुरु14:0115:02दिन
मंगल15:0216:03दिन
सूर्य16:0317:04दिन
शुक्र17:0418:05दिन
बुध18:0519:04रात
चंद्र19:0420:03रात
शनि20:0321:02रात
गुरु21:0222:01रात
मंगल22:0123:00रात
सूर्य23:0023:59रात
शुक्र23:5900:58रात
बुध00:5801:57रात
चंद्र01:5702:56रात
शनि02:5603:55रात
गुरु03:5504:54रात
मंगल04:5405:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2094° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।