8 सितंबर 2025 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 8 सितंबर 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 8 सितंबर 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (18:42 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (17:32 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 07:10 से 08:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 18:04
रात 05:37 तक
तिथि
प्रतिपदा, 18:42 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 17:32 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 18:42 तक
कृष्ण द्वितीया 15:59, 9 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 15:37, 9 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 00:50, 9 सित॰ तक
गंडअशुभ 21:28, 9 सित॰ तक
करण
बालव 07:58 तक
कौलव 18:42 तक
तैतिल 05:22, 9 सित॰ तक
गर 15:59, 9 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 11:59 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
18:33
चंद्रास्त
06:01
दिनमान
12h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
07:10 – 08:43
यमगंड
10:17 – 11:50
गुलिक काल
13:24 – 14:57

8 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:36 – 07:10शुभ
काल07:10 – 08:43टालें
शुभ08:43 – 10:17शुभ
रोग10:17 – 11:50टालें
उद्वेग11:50 – 13:24टालें
चर13:24 – 14:57सामान्य
लाभ14:57 – 16:30शुभ
अमृत16:30 – 18:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:04 – 19:30सामान्य
रोग19:30 – 20:57टालें
काल20:57 – 22:24टालें
लाभ22:24 – 23:50शुभ
उद्वेग23:50 – 01:17टालें
शुभ01:17 – 02:43शुभ
अमृत02:43 – 04:10शुभ
चर04:10 – 05:37सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3606:39दिन
शनि06:3907:41दिन
गुरु07:4108:43दिन
मंगल08:4309:45दिन
सूर्य09:4510:48दिन
शुक्र10:4811:50दिन
बुध11:5012:52दिन
चंद्र12:5213:55दिन
शनि13:5514:57दिन
गुरु14:5715:59दिन
मंगल15:5917:02दिन
सूर्य17:0218:04दिन
शुक्र18:0419:02रात
बुध19:0219:59रात
चंद्र19:5920:57रात
शनि20:5721:55रात
गुरु21:5522:53रात
मंगल22:5323:50रात
सूर्य23:5000:48रात
शुक्र00:4801:46रात
बुध01:4602:43रात
चंद्र02:4303:41रात
शनि03:4104:39रात
गुरु04:3905:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2159° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।