27 अक्टूबर 2025 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (05:30, 28 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (10:57 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 07:22 से 08:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 17:16
रात 05:57 तक
तिथि
षष्ठी, 05:30 तक
नक्षत्र
मूल, 10:57 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 05:30, 28 अक्टू॰ तक
शुक्ल सप्तमी 06:53, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 10:57 तक
पूर्वाषाढ़ा 13:15, 28 अक्टू॰ तक
योग
सुकर्मा 05:20, 28 अक्टू॰ तक
धृति 05:21, 29 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 16:36 तक
तैतिल 05:30, 28 अक्टू॰ तक
गर 18:16, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
11:00
चंद्रास्त
21:29
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
07:22 – 08:47
यमगंड
10:11 – 11:36
गुलिक काल
13:01 – 14:26

27 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:57 – 07:22शुभ
काल07:22 – 08:47टालें
शुभ08:47 – 10:11शुभ
रोग10:11 – 11:36टालें
उद्वेग11:36 – 13:01टालें
चर13:01 – 14:26सामान्य
लाभ14:26 – 15:51शुभ
अमृत15:51 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:16 – 18:51सामान्य
रोग18:51 – 20:26टालें
काल20:26 – 22:01टालें
लाभ22:01 – 23:37शुभ
उद्वेग23:37 – 01:12टालें
शुभ01:12 – 02:47शुभ
अमृत02:47 – 04:22शुभ
चर04:22 – 05:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5706:53दिन
शनि06:5307:50दिन
गुरु07:5008:47दिन
मंगल08:4709:43दिन
सूर्य09:4310:40दिन
शुक्र10:4011:36दिन
बुध11:3612:33दिन
चंद्र12:3313:30दिन
शनि13:3014:26दिन
गुरु14:2615:23दिन
मंगल15:2316:19दिन
सूर्य16:1917:16दिन
शुक्र17:1618:19रात
बुध18:1919:23रात
चंद्र19:2320:26रात
शनि20:2621:30रात
गुरु21:3022:33रात
मंगल22:3323:37रात
सूर्य23:3700:40रात
शुक्र00:4001:44रात
बुध01:4402:47रात
चंद्र02:4703:50रात
शनि03:5004:54रात
गुरु04:5405:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।