8 अक्टूबर 2026 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (19:46 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (18:50 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 13:08 से 14:36 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 17:33
रात 05:48 तक
तिथि
त्रयोदशी, 19:46 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 18:50 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 19:46 तक
कृष्ण चतुर्दशी 19:06, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 18:49, 9 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 22:28 तक
ब्रह्म 20:51, 9 अक्टू॰ तक
करण
गर 08:14 तक
वणिज 19:46 तक
विष्टि (भद्रा) 07:23, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 00:48, 9 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
03:29
चंद्रास्त
16:06
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:17 – 12:04

अशुभ समय

राहुकाल
13:08 – 14:36
यमगंड
05:47 – 07:16
गुलिक काल
08:44 – 10:12

8 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:47 – 07:16शुभ
रोग07:16 – 08:44टालें
उद्वेग08:44 – 10:12टालें
चर10:12 – 11:40सामान्य
लाभ11:40 – 13:08शुभ
अमृत13:08 – 14:36शुभ
काल14:36 – 16:04टालें
शुभ16:04 – 17:33शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:33 – 19:05शुभ
चर19:05 – 20:36सामान्य
रोग20:36 – 22:08टालें
काल22:08 – 23:40टालें
लाभ23:40 – 01:12शुभ
उद्वेग01:12 – 02:44टालें
शुभ02:44 – 04:16शुभ
अमृत04:16 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4706:46दिन
मंगल06:4607:45दिन
सूर्य07:4508:44दिन
शुक्र08:4409:42दिन
बुध09:4210:41दिन
चंद्र10:4111:40दिन
शनि11:4012:39दिन
गुरु12:3913:38दिन
मंगल13:3814:36दिन
सूर्य14:3615:35दिन
शुक्र15:3516:34दिन
बुध16:3417:33दिन
चंद्र17:3318:34रात
शनि18:3419:35रात
गुरु19:3520:36रात
मंगल20:3621:38रात
सूर्य21:3822:39रात
शुक्र22:3923:40रात
बुध23:4000:41रात
चंद्र00:4101:43रात
शनि01:4302:44रात
गुरु02:4403:45रात
मंगल03:4504:47रात
सूर्य04:4705:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2310° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।