23 अक्टूबर 2026 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (12:06 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (18:33 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 10:11 से 11:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:19
रात 05:55 तक
तिथि
द्वादशी, 12:06 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 18:33 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 12:06 तक
शुक्ल त्रयोदशी 11:07, 24 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 18:02, 24 अक्टू॰ तक
योग
ध्रुव 19:38 तक
व्याघातअशुभ 17:31, 24 अक्टू॰ तक
करण
बालव 12:06 तक
कौलव 23:42 तक
तैतिल 11:07, 24 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 12:34 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
15:25
चंद्रास्त
02:58
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 12:00

अशुभ समय

राहुकाल
10:11 – 11:37
यमगंड
14:28 – 15:54
गुलिक काल
07:20 – 08:46

23 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:20सामान्य
लाभ07:20 – 08:46शुभ
अमृत08:46 – 10:11शुभ
काल10:11 – 11:37टालें
शुभ11:37 – 13:02शुभ
रोग13:02 – 14:28टालें
उद्वेग14:28 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:19सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:19 – 18:54टालें
काल18:54 – 20:28टालें
लाभ20:28 – 22:03शुभ
उद्वेग22:03 – 23:37टालें
शुभ23:37 – 01:12शुभ
अमृत01:12 – 02:46शुभ
चर02:46 – 04:21सामान्य
रोग04:21 – 05:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:52दिन
बुध06:5207:49दिन
चंद्र07:4908:46दिन
शनि08:4609:43दिन
गुरु09:4310:40दिन
मंगल10:4011:37दिन
सूर्य11:3712:34दिन
शुक्र12:3413:31दिन
बुध13:3114:28दिन
चंद्र14:2815:25दिन
शनि15:2516:22दिन
गुरु16:2217:19दिन
मंगल17:1918:22रात
सूर्य18:2219:25रात
शुक्र19:2520:28रात
बुध20:2821:31रात
चंद्र21:3122:34रात
शनि22:3423:37रात
गुरु23:3700:40रात
मंगल00:4001:43रात
सूर्य01:4302:46रात
शुक्र02:4603:49रात
बुध03:4904:52रात
चंद्र04:5205:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2316° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।