24 दिसंबर 2026 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 24 दिसंबर 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 24 दिसंबर 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (00:37, 25 दिस॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (23:17 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:10 पर है। राहुकाल 13:12 से 14:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:10
रात 06:34 तक
तिथि
प्रतिपदा, 00:37 तक
द्वितीया
नक्षत्र
आर्द्रा, 23:17 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:37, 25 दिस॰ तक
कृष्ण द्वितीया 20:56, 25 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:20, 25 दिस॰ तक
योग
शुक्ल 10:21 तक
ब्रह्म 05:58, 25 दिस॰ तक
इंद्र 01:46, 26 दिस॰ तक
करण
बालव 14:32 तक
कौलव 00:37, 25 दिस॰ तक
तैतिल 10:45, 25 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:10
चंद्रोदय
17:36
चंद्रास्त
06:52
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
13:12 – 14:31
यमगंड
06:34 – 07:53
गुलिक काल
09:13 – 10:33

24 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:34 – 07:53शुभ
रोग07:53 – 09:13टालें
उद्वेग09:13 – 10:33टालें
चर10:33 – 11:52सामान्य
लाभ11:52 – 13:12शुभ
अमृत13:12 – 14:31शुभ
काल14:31 – 15:51टालें
शुभ15:51 – 17:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:10 – 18:51शुभ
चर18:51 – 20:31सामान्य
रोग20:31 – 22:12टालें
काल22:12 – 23:52टालें
लाभ23:52 – 01:33शुभ
उद्वेग01:33 – 03:13टालें
शुभ03:13 – 04:54शुभ
अमृत04:54 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3407:27दिन
मंगल07:2708:20दिन
सूर्य08:2009:13दिन
शुक्र09:1310:06दिन
बुध10:0610:59दिन
चंद्र10:5911:52दिन
शनि11:5212:45दिन
गुरु12:4513:38दिन
मंगल13:3814:31दिन
सूर्य14:3115:24दिन
शुक्र15:2416:17दिन
बुध16:1717:10दिन
चंद्र17:1018:17रात
शनि18:1719:24रात
गुरु19:2420:31रात
मंगल20:3121:38रात
सूर्य21:3822:45रात
शुक्र22:4523:52रात
बुध23:5200:59रात
चंद्र00:5902:06रात
शनि02:0603:13रात
गुरु03:1304:20रात
मंगल04:2005:27रात
सूर्य05:2706:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2339° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।