6 अक्टूबर 2027 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (01:43, 7 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (01:58, 7 अक्टू॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 11:41 से 13:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:35
रात 05:47 तक
तिथि
सप्तमी, 01:43 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मूल, 01:58 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 01:43, 7 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 03:58, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 01:58, 7 अक्टू॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 04:44, 8 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 09:08 तक
शोभन 09:33, 7 अक्टू॰ तक
करण
गर 12:48 तक
वणिज 01:43, 7 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:47, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
11:49
चंद्रास्त
22:25
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:17 – 12:04 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:41 – 13:09
यमगंड
07:15 – 08:44
गुलिक काल
10:12 – 11:41

6 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:46 – 07:15शुभ
अमृत07:15 – 08:44शुभ
काल08:44 – 10:12टालें
शुभ10:12 – 11:41शुभ
रोग11:41 – 13:09टालें
उद्वेग13:09 – 14:38टालें
चर14:38 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:35 – 19:06टालें
शुभ19:06 – 20:38शुभ
अमृत20:38 – 22:09शुभ
चर22:09 – 23:41सामान्य
रोग23:41 – 01:12टालें
काल01:12 – 02:44टालें
लाभ02:44 – 04:15शुभ
उद्वेग04:15 – 05:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4606:45दिन
चंद्र06:4507:45दिन
शनि07:4508:44दिन
गुरु08:4409:43दिन
मंगल09:4310:42दिन
सूर्य10:4211:41दिन
शुक्र11:4112:40दिन
बुध12:4013:39दिन
चंद्र13:3914:38दिन
शनि14:3815:37दिन
गुरु15:3716:36दिन
मंगल16:3617:35दिन
सूर्य17:3518:36रात
शुक्र18:3619:37रात
बुध19:3720:38रात
चंद्र20:3821:39रात
शनि21:3922:40रात
गुरु22:4023:41रात
मंगल23:4100:42रात
सूर्य00:4201:43रात
शुक्र01:4302:44रात
बुध02:4403:45रात
चंद्र03:4504:46रात
शनि04:4605:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2449° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।