23 दिसंबर 2028 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 23 दिसंबर 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 23 दिसंबर 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (11:28 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (14:37 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:10 पर है। राहुकाल 09:13 से 10:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:10
रात 06:34 तक
तिथि
सप्तमी, 11:28 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 14:37 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 11:28 तक
शुक्ल अष्टमी 14:00, 24 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 17:34, 24 दिस॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 00:43, 24 दिस॰ तक
वरीयान 01:31, 25 दिस॰ तक
करण
वणिज 11:28 तक
विष्टि (भद्रा) 00:44, 24 दिस॰ तक
बव 14:00, 24 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 07:53 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:10
चंद्रोदय
11:15
चंद्रास्त
23:51
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
09:13 – 10:32
यमगंड
13:11 – 14:31
गुलिक काल
06:34 – 07:53

23 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:34 – 07:53टालें
शुभ07:53 – 09:13शुभ
रोग09:13 – 10:32टालें
उद्वेग10:32 – 11:52टालें
चर11:52 – 13:11सामान्य
लाभ13:11 – 14:31शुभ
अमृत14:31 – 15:51शुभ
काल15:51 – 17:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:10 – 18:51शुभ
उद्वेग18:51 – 20:31टालें
शुभ20:31 – 22:12शुभ
अमृत22:12 – 23:52शुभ
चर23:52 – 01:33सामान्य
रोग01:33 – 03:13टालें
काल03:13 – 04:54टालें
लाभ04:54 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3407:27दिन
गुरु07:2708:20दिन
मंगल08:2009:13दिन
सूर्य09:1310:06दिन
शुक्र10:0610:59दिन
बुध10:5911:52दिन
चंद्र11:5212:45दिन
शनि12:4513:38दिन
गुरु13:3814:31दिन
मंगल14:3115:24दिन
सूर्य15:2416:17दिन
शुक्र16:1717:10दिन
बुध17:1018:17रात
चंद्र18:1719:24रात
शनि19:2420:31रात
गुरु20:3121:38रात
मंगल21:3822:45रात
सूर्य22:4523:52रात
शुक्र23:5200:59रात
बुध00:5902:06रात
चंद्र02:0603:13रात
शनि03:1304:20रात
गुरु04:2005:27रात
मंगल05:2706:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2618° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।