31 दिसंबर 2028 को रियाद का पंचांग

रविवार, 31 दिसंबर 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 31 दिसंबर 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (19:48 तक), नक्षत्र आर्द्रा (02:20, 1 जन॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 15:55 से 17:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:15
रात 06:37 तक
तिथि
पूर्णिमा, 19:48 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
आर्द्रा, 02:20 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 19:48 तक
कृष्ण प्रतिपदा 18:23, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 02:20, 1 जन॰ तक
पुनर्वसु 01:27, 2 जन॰ तक
योग
ब्रह्म 21:04 तक
इंद्र 18:42, 1 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:20 तक
बव 19:48 तक
बालव 07:09, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
17:04
चंद्रास्त
06:12
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
15:55 – 17:15
यमगंड
11:56 – 13:16
गुलिक काल
14:35 – 15:55

31 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:37 – 07:57टालें
चर07:57 – 09:16सामान्य
लाभ09:16 – 10:36शुभ
अमृत10:36 – 11:56शुभ
काल11:56 – 13:16टालें
शुभ13:16 – 14:35शुभ
रोग14:35 – 15:55टालें
उद्वेग15:55 – 17:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:15 – 18:55शुभ
अमृत18:55 – 20:35शुभ
चर20:35 – 22:16सामान्य
रोग22:16 – 23:56टालें
काल23:56 – 01:36टालें
लाभ01:36 – 03:17शुभ
उद्वेग03:17 – 04:57टालें
शुभ04:57 – 06:37शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3707:30दिन
शुक्र07:3008:23दिन
बुध08:2309:16दिन
चंद्र09:1610:09दिन
शनि10:0911:03दिन
गुरु11:0311:56दिन
मंगल11:5612:49दिन
सूर्य12:4913:42दिन
शुक्र13:4214:35दिन
बुध14:3515:29दिन
चंद्र15:2916:22दिन
शनि16:2217:15दिन
गुरु17:1518:22रात
मंगल18:2219:29रात
सूर्य19:2920:35रात
शुक्र20:3521:42रात
बुध21:4222:49रात
चंद्र22:4923:56रात
शनि23:5601:03रात
गुरु01:0302:10रात
मंगल02:1003:17रात
सूर्य03:1704:23रात
शुक्र04:2305:30रात
बुध05:3006:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2622° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।