7 सितंबर 2025 को सिलीगुड़ी का पंचांग

रविवार, 7 सितंबर 2025, सिलीगुड़ी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 सितंबर 2025 को सिलीगुड़ी में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (23:38 तक), नक्षत्र शतभिषा (21:41 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 16:16 से 17:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 17:49
रात 05:18 तक
तिथि
पूर्णिमा, 23:38 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 21:41 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 सितंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 23:38 तक
कृष्ण प्रतिपदा 21:12, 8 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:41 तक
पूर्वा भाद्रपद 20:02, 8 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 09:22 तक
धृति 06:30, 8 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:43 तक
बव 23:38 तक
बालव 10:28, 8 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
17:39
चंद्रास्त
04:33
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
16:16 – 17:49
यमगंड
11:34 – 13:08
गुलिक काल
14:42 – 16:16

7 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:18 – 06:52टालें
चर06:52 – 08:26सामान्य
लाभ08:26 – 10:00शुभ
अमृत10:00 – 11:34शुभ
काल11:34 – 13:08टालें
शुभ13:08 – 14:42शुभ
रोग14:42 – 16:16टालें
उद्वेग16:16 – 17:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:49 – 19:16शुभ
अमृत19:16 – 20:42शुभ
चर20:42 – 22:08सामान्य
रोग22:08 – 23:34टालें
काल23:34 – 01:00टालें
लाभ01:00 – 02:26शुभ
उद्वेग02:26 – 03:52टालें
शुभ03:52 – 05:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1806:21दिन
शुक्र06:2107:23दिन
बुध07:2308:26दिन
चंद्र08:2609:29दिन
शनि09:2910:31दिन
गुरु10:3111:34दिन
मंगल11:3412:36दिन
सूर्य12:3613:39दिन
शुक्र13:3914:42दिन
बुध14:4215:44दिन
चंद्र15:4416:47दिन
शनि16:4717:49दिन
गुरु17:4918:47रात
मंगल18:4719:44रात
सूर्य19:4420:42रात
शुक्र20:4221:39रात
बुध21:3922:37रात
चंद्र22:3723:34रात
शनि23:3400:31रात
गुरु00:3101:29रात
मंगल01:2902:26रात
सूर्य02:2603:24रात
शुक्र03:2404:21रात
बुध04:2105:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिलीगुड़ी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2158° (लाहिड़ी)। समय सिलीगुड़ी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।