6 अक्टूबर 2027 को सिंगापुर का पंचांग

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

बुधवार, 6 अक्टूबर 2027 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (06:43, 7 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (06:58, 7 अक्टू॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 12:52 से 14:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 18:55
रात 06:49 तक
तिथि
सप्तमी, 06:43 तक
नक्षत्र
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 06:43, 7 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 08:58, 8 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 06:58, 7 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 14:08 तक
शोभन 14:33, 7 अक्टू॰ तक
करण
गर 17:48 तक
वणिज 06:43, 7 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 19:47, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
12:00
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:52 – 14:23
यमगंड
08:20 – 09:51
गुलिक काल
11:22 – 12:52

6 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:50 – 08:20शुभ
अमृत08:20 – 09:51शुभ
काल09:51 – 11:22टालें
शुभ11:22 – 12:52शुभ
रोग12:52 – 14:23टालें
उद्वेग14:23 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:25सामान्य
लाभ17:25 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:55 – 20:25टालें
शुभ20:25 – 21:54शुभ
अमृत21:54 – 23:23शुभ
चर23:23 – 00:52सामान्य
रोग00:52 – 02:22टालें
काल02:22 – 03:51टालें
लाभ03:51 – 05:20शुभ
उद्वेग05:20 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5007:50दिन
चंद्र07:5008:51दिन
शनि08:5109:51दिन
गुरु09:5110:52दिन
मंगल10:5211:52दिन
सूर्य11:5212:52दिन
शुक्र12:5213:53दिन
बुध13:5314:53दिन
चंद्र14:5315:54दिन
शनि15:5416:54दिन
गुरु16:5417:55दिन
मंगल17:5518:55दिन
सूर्य18:5519:55रात
शुक्र19:5520:54रात
बुध20:5421:54रात
चंद्र21:5422:53रात
शनि22:5323:53रात
गुरु23:5300:52रात
मंगल00:5201:52रात
सूर्य01:5202:51रात
शुक्र02:5103:51रात
बुध03:5104:50रात
चंद्र04:5005:50रात
शनि05:5006:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2449° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।